[ad_1]

बाएं ललित झा के माता-पिता और दाएं ग्रामीण।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
संसद भवन में घुसपैठ करने वाले दरभंगा के ललित झा को लेकर उसके गांव रामपुर उदय के लोगों में काफी नाराजगी है। लोग इस बात से आश्चर्यचकित हैं कि कल तक सबों की खिदमत करने वाला ललित झा आखिर इस तरह की गतिविधि में कैसे शामिल हो गया। इस खबर के मिलने के बाद ग्रामीणों के लिए यह चर्चा का विषय बना हुआ है। ग्रामीणों का कहना है कि ललित अपने माता पिता के साथ कई कई महीनों पर अपने घर आया करता था। हमलोग के साथ बहुत ही शालीनता के साथ बात करता था। लेकिन अचानक से टीवी और अखबार के माध्यम से जानकारी मिली कि ललित संसद भवन में हंगामा मचाने वालों में वह शामिल था और दिल्ली पुलिस ने इसे ही पूरे घटना का मास्टरमाइंड बताया है, इस बात को जानकर हमलोग दुखी हैं।
ग्रामीणों का सिर झुक गया है
इस संबंध में ललित झा के पड़ोसी अमित झा का कहना है कि ग्रामीण होने के नाते वह हमको कभी इस व्यवहार का व्यक्ति नहीं लगा था। लेकिन अभी जो देख रहे हैं जिसमें संसद भवन में घुसपैठ मामले में उसे मास्टर माइंड बताया जा रहा है, उसमें वह तो सही दिख रहा है। वह देखने से बिल्कुल ही साधारण बच्चा था। हमलोग अभी उसको आंतकवादी नही कहेंगे लेकिन सत्य है कि उसने गलत काम किया है। उसके पास कोई भी हथियार नही था उसने अपने क्रांतिकारी मुद्दे को गलत तरीके से उठाया जिसकी सजा उसे भुगतनी पड़ेगी। अमित झा ने बताया कि करीब एक वर्ष से मेरी उससे मुलाकात नहीं हुई है। उसके इस हरकत से ग्रामीणों का सर नीचे झुक गया है। उसके इस गलत निर्णय की सजा उसे भुगतना ही पड़ेगा।
ग्रामीण हैं हैरान
इस संबंध में ग्रामीण कमल मिश्रा का कहना है कि हमलोग उसे बच्चा से देख रहे हैं। बचपन में यहां पढ़ाई करने के बाद वह कोलकाता चला गया और वहां भी वह पढ़ लिख रहा था। वह न तो गुंडा था और न आतंकवादी था। जैसा टीवी में दिख रहा है ऐसा तो हमलोग उसके विषय में सोचे भी नही थे। वह जब गांव आता तो किसी से भी मुंह उठाकर बात भी नहीं करता था। हमलोगों को यह नही मालूम था कि वह बाहर में क्या कर रहा था। हमलोग खुद इस घटना को सुनकर परेशान हैं कि उसने क्या कर लिया।
[ad_2]
Source link