Pasmanda Muslim: ‘पांच किलो गेहूं-चावल से नहीं होगा पसमांदा मुसलमानों का विकास, उनकी मर्ज अलग है’

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Former minister Anees Mansuree talks about problems of Pasmanda Muslims.

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : Social Media

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पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष एवं पूर्व राज्य मंत्री अनीस मंसूरी ने कहा कि पसमांदा मुसलमानों का विकास पांच किलो गेहूं-चावल देने की योजना से नही हो सकता। उन्होंने कहा कि पसमांदा मुसलमानों का मर्ज अलग है, इसलिये प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को दवा भी अलग देनी चाहिये। वो संगठन की कार्यकारिणी बैठक को संबोधित कर रहे थे।

अलीगंज स्थित बैंकेट हॉल में आयोजित बैठक को संबोधित करते हुये उन्होंने कहा कि पसमांदा समाज अब राजनीतिक पार्टियों का वोटबैंक नही बनेगा। पीएम मोदी को पसमांदा मुसलमानों का दर्द अच्छी तरह से पता है लेकिन वह पांच किलो गेहूं चावल जैसी सरकारी योजनाओं की गिनती करवा कर भाजपा की तरफ आकर्षित करना चाहते हैं। यही वजह है कि भाजपा देशभर में पसमांदा यात्रा निकालने की तैयारियों में जुटी है।

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अनीस मंसूरी ने कहा कि 80 फीसदी आबादी वाला पसमांदा मुसलमान वर्ष 1950 से ठगा जा रहा है जब संविधान के अनुच्छेद 341 पर राष्ट्रपति के जरिये अध्यादेश लाकर पाबंदी लगा दी गई थी। उन्होंने बीती 3 जुलाई को प्रधानमंत्री मोदी ने पसमांदा मुसलमानों की बदहाली पर बोला तो समाज को लगा था कि अन्य राजनीतिक पार्टियों से अलग ऐसा भी पीएम है जो उनके दर्द को समझता है।

उन्होंने प्रधानमंत्री के बयान को एक साल बीत गये तब से सिर्फ पिछली सरकारों को कोसते आ रहे हैं लेकिन उन्होंने पसमांदा मुसलमानों के लिये कोई कार्ययोजना नही बनाई। महासचिव हाजी अंजुम अली एडवोकेट ने कहा कि पसमांदा स्नेह यात्रा से समाज का भला नही होगा।

लोकसभा चुनाव के पहले प्रधानमंत्री को समाज के लिये कुछ करना होगा। इस मौके पर मुख्य रूप से मुख्तार मंसूरी, वसीम राईनी, हाजी हनीफ मंसूरी, नसीम मंसूरी, तहसीन मंसूरी, तनवीर मंसूरी, रहीम बख्श मंसूरी, हाजी शब्बन मंसूरी, पप्पू कुरैशी आदि मौजूद रहे।

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