Patna Metro : DMRC ने पहली बार किया प्रयोग; अंडरग्राउंड निर्माण के कारण ऊपर वाले भवनों पर असर जांचेगी यह मशीन

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Real Time Monitoring of Buildings above underground Metro Station started in Patna Metro by DMRC

पटना मेट्रो
– फोटो : Social media

विस्तार


पटना मेट्रो रेल प्रोजेक्ट में भूमिगत मेट्रो स्टेशनों में टनलिंग (सुरंग की खुदाई) के दौरान अलाइन्मेंट में पड़ने वाले एवं निर्माणाधीन साईट के आसपास स्थित मकानों की स्थिति की मॉनिटरिंग के लिए समुचित इंस्ट्रूमेंटेशन एवं मॉनिटरिंग सिस्टम एवं रियल टाइम मॉनिटरिंग जैसे आधुनिकतम पद्धतियों का उपयोग कर रहा,  जिससे मकानों की “रियल टाइम मॉनिटरिंग (जैसे-जैसे सुरंग की खुदाई होती है मॉनिटरिंग सिस्टम मकानों में किसी प्रकार के वाइब्रेशन को मॉनिटर करता जाता है )”।

डीएमआरसी न केवल अपने यात्रियों के यातायात को आरामदायक बनाने के लिए प्रतिबद्ध है, बल्कि किए जा रहे निर्माण कार्यों के दौरान नागरिकों की सुरक्षा भी प्रमुख प्राथमिकता है।भूमिगत मेट्रो स्टेशनों में टनलिंग (सुरंग की खुदाई) को लेकर लोगों के मन अनको भय और सवाल हैं। इसके लिए टनलिंग इलाके में रहने वाले लोगों के मन में टनलिंग को लेकर भय और भ्रान्ति को दूर करने के लिए अनिकों उपाए कर रहा है।

चूंकि पटना, बिहार के सबसे पुराने शहरों में से एक है, यहाँ ऐसे अनेक भवन एवं संरचनाएं हैं जो अलाइन्मेंट की सीमा में आते हैं और जिनका ऐतिहासिक और पुरातात्विक महत्व है ।इन कारणों के आधार पर भूमिगत मेट्रो स्टेशन के अलाइन्मेंट की सीमा का सर्वे किया गया है और अलाइन्मेंट की सीमा में आने वाले प्रत्येक भवनों/संरचनाओं की उनकी वर्तमान स्थिति, गंभीरता के आधार पर सूची बनाई गई है। चौबीस घंटे की मॉनिटरिंग से यह सुनिश्चित किया जा रहा कि कहीं जमीन न धंसे और किसी संरचना को कोई नुकसान न हो। पहली बार बीम से टनलिंग कार्य के दौरान मॉनिटरिंग पटना मेट्रो में डीएमआरसी द्वारा भारत में पहली बार टीबीएम से हो रही टनल की खुदाई की मॉनिटरिंग के लिए बीम (BEAM) (बोर टनेलिंग इलेक्ट्रिकल अहेड मॉनिटरिंग) सिस्टम का प्रयोग पटना मेट्रो में किया जा रहा है।

क्या है बोर टनलिंग इलेक्ट्रिकल अहेड मॉनिटरिंग (BEAM) सिस्टम

बोर टनलिंग इलेक्ट्रिकल अहेड मॉनिटरिंग (बीईएएम) सिस्टम, टीबीएम से टनल की खुदाई के समय मॉनिटरिंग करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। टनलिंग (सुरंग की खुदाई) के दौरान निर्माणाधीन साईट के आसपास स्थित मकानों की स्थिति की जाती है।

किन उपकरणों का किया जाता है मॉनिटरिंग के लिए उपयोग 

टनलिंग (सुरंग की खुदाई) के दौरान अलाइन्मेंट में पड़ने वाले संबंधित निर्माणाधीन साईट के आसपास स्थित मकानों की स्थिति को मॉनिटर करने के लिए विभिन्न प्रकार की आधुनिक उपकरणों को लगाया गया है। भूमिगत स्टेशन एवं टनल अलाइन्मेंट के इंस्ट्रूमेंटेशन एवं मॉनिटरिंग योजना के के तहत अलाइन्मेंट में  पड़ने वाले संबंधित भवनों पर अनेकों उपकरण जैसे इंकलिनोमीटर (INC), स्ट्रैन-गैज (SG), इंकलिनोमीटर-कम- एक्सटेन्सोमीटर (I/E), वाइब्रैटिंग वायर पीज़ोमीटर (VPZ), मल्टी पॉइंट बोरहोल एक्सटेन्सोमीटर (MPBX), कन्वर्जन्स पॉइंट (CP), ग्राउन्ड सेटलमेन्ट मार्कर (GSM), पैवमेन्ट सेटलमेन्ट मार्कर (PSM), बिल्डिंग सेटलमेन्ट मार्कर (BSM), टाइटल प्लेट (TP), क्रैक मीटर्स (CM) 3D बाइ-रेफलेक्स टार्गेट्स (BRT) आदि को अलाइन्मेंट में पड़ने वाले भवनों पर लगाए गए हैं, जिनसे टीबीएम से टनलिंग के दौरान नियमित रूप से  मॉनिटरिंग की जा रही है। अभी मोइन-उल-हक स्टेडियम भूमिगत मेट्रो स्टेशन में टनलिंग का कार्य किया जा रहा है जोकि पटना विश्वविद्यालय मेट्रो स्टेशन टनल की ओर योजनानुसार बढ़ रहा है।

गौरतलब है कि इन इलाकों में अनेकों पुराने मकान हैं जिनकी  स्थिति अच्छी नहीं हैं ।मोइन-उल-हक स्टेडियम से पटना विश्वविद्यालय और पीएमसीएच की ओर किए जा रहे टनलिंग अभियान में इन भवनों की स्थिति की नियमित मॉनिटरिंग की जा रही है। इस बात का पूरा ख्याल रखा जा रहा है कि टनलिंग कार्य से इस क्षेत्र में स्थित किसी भी मकान को कोई नुकसान न पहुंचे। डीएमआरसी की प्रतिबद्धता न केवल स्थानीय यातायात का स्वरूप बदलने की है बल्कि लोगों और भवनों की सुरक्षा भी प्राथमिकता है।जिसके लिए पटना मेट्रो निर्माण कार्य और खासकर टनलिंग कार्य के दौरान मॉनिटरिंग और सुरक्षा के लिए समुचित कदम उठाए जाएंगे।

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