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परफॉर्मिंग ग्रेडिंग इंडेक्स को लेकर सचिवालय में हुई बैठक।
– फोटो : अमर उजाला
विस्तार
शिक्षा के क्षेत्र में कुछ वर्ष पूर्व तक केरल से मुकाबला करते हुए दूसरे स्थान पर रहने वाले हिमाचल प्रदेश की रैंकिंग 13वें स्थान से अब 17वें स्थान पर पहुंच गई है। प्रदेश में जगह-जगह कम दूरी पर स्कूल खुलने, रट्टा अधिक लगने और यू डाइस डाटा सही तरीके से न भरने से रैकिंग में कमी दर्ज हुई है। परफॉर्मिंग ग्रेडिंग इंडेक्स 2021-22 की रिपोर्ट के बाद जागी सरकार ने सुधार लाने के लिए एक्शन प्लान बनाना शुरू कर दिया है। 10-15 किलोमीटर के दायरे में अब सुविधायुक्त एक स्कूल देने और परिणाम बढ़ाने पर फोकस करने का फैसला लिया गया है। शुक्रवार को राज्य सचिवालय में केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय की ओर से जारी परफॉर्मिंग ग्रेडिंग इंडेक्स-2.0 (पीजीआई-2.0) 2021-22 की रिपोर्ट को लेकर बैठक हुई।
शिक्षा मंत्री रोहित ठाकुर रोहड़ू से वर्चुअल तौर पर बैठक में शामिल हुए। सीपीएस शिक्षा आशीष बुटेल और शिक्षा सचिव राकेश कंवर ने शिक्षा के क्षेत्र में सुधार लाने को लेकर विस्तार से चर्चा की। बैठक में बताया कि हिमाचल को 2021-22 की रिपोर्ट में 538 अंक प्राप्त हुए हैं। प्रदेश को देशभर में 17वां स्थान मिला है। इससे पहले प्रदेश का स्थान 13वां था। फैसला लिया गया कि शिक्षण परिणाम बढ़ाने के लिए पढ़ाई का रट्टा लगाने की प्रथा को खत्म करना होगा। बच्चों को समझ के साथ पढ़ाई के लिए प्रेरित किया जाएगा। अगले वर्ष होने वाले नेशनल अचीवमेंट सर्वे के लिए अभी से तैयारियां शुरू की जाएंगी। तीसरी, पांचवीं, नवीं और 11वीं कक्षा के विद्यार्थियों की इस सर्वे के तहत परीक्षा होती है। इस सर्वे में भी हिमाचल के विद्यार्थी पिछड़ रहे हैं।
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