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ओम प्रकाश ने बताया कि यह बनारस की अपनी कला है। इससे बने उत्पाद हजारों वर्षों से उपयोग हो रहे हैं। आधुनिकता के दौर में यह कला लुप्त हो रही थी। 2014 से उम्मीद जगी है। सरकार के प्रचार-प्रसार के कारण काष्ठ कला से बने उत्पादों को लोग जानने लगे और उनका रुझान बढ़ा। प्रदर्शनियों की वजह से 2017 के बाद से बल मिला। स्थिति यह है कि हम मांग के अनुसार आपूर्ति नहीं कर पा रहे हैं।
ओम प्रकाश ने बताया कि यह कला हमारे परिवार के बाहर नहीं जा पा रही है। सरकार से मांग है कि वाराणसी में काष्ठ कला के लिए एक प्रशिक्षण केंद्र खोला जाए। ताकि वाराणसी की प्राचीन कला को और भी लोग सीख सकें।
ओम ने बताया कि काष्ठ कला से बने उत्पाद बाजार में 8 हजार से पांच लाख रुपये तक बिकते हैं। यह उत्पाद हाथों और मशीनों से बनाए जाते हैं तथा इन्हें बनाने में समय लगता है। बारीक कलाकारी होने के कारण इनकी कीमत अधिक होती है। काष्ठ कला से बने राम दरबार की कीमत कम से कम 10 हजार रुपये है।
जनवरी में हुए जी 7 सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इंडोनेशिया के राष्ट्रपति जोको विडोडो को काष्ठ कला से बना राम दरबार भेंट किया था। इसे बनाने के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय से जनवरी में निर्देश प्राप्त हुए थे। इसे बनाने में करीब महीने का समय लगा था। कुछ दिन पूर्व मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को राम दरबार भेंट किया था।
काशी की काष्ठ कला काफी प्राचीन है और पूरी दुनिया में इसकी मांग है। काशी की सांस्कृतिक विरासत उसकी पहचान है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शिल्प को वैश्विक पहचान दिलाने के लिए टीएफसी का निर्माण करवाया। इस केंद्र द्वारा कलाकारों को अपनी कारीगरी दिखाने का सुनहरा मौका मिला है।
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