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रोमांच, हैरतंगेज कारनामे, सूर्पणखा के पीछे असुरों की सेना, 115 लाग विमान। हमास और इस्राइल के युद्ध की झांकी के साथ ही सड़क पर जब चंद्रयान उतरा तो जनता का उत्साह देखने लायक था। हर साल कुछ नया देखने की चाह में श्रद्धालु भोर तक गली से लेकर सड़क जमे रहे। दो किलोमीटर के दायरे में निकलने वाले लाग विमान विमान और झांकियों को देखने के लिए चेतगंज की सड़क से लेकर गलियों तक सवा दो लाख से अधिक की भीड़ जुटी।
बुधवार को चेतगंज के नक्कटैया मेले में लाग विमान और झांकियां हर किसी के आकर्षण का केंद्र रहीं। पांच घंटे तक चलने वाले काशी के तीसरे लक्खा मेला की रौनक देखने के लिए रात भर लोग चलते रहे। मध्य रात्रि में जैसे ही लक्ष्मण ने सूर्पणखा की नाक काटी तो असुरों में खलबली मच गई। नाक से खून का फव्वारा फेंकती हुई सूर्पणखा का भयानक रूप देखकर जनता भी उसके पीछे हो ली।
इसके बाद खर दूषण की सेना के रूप में लाग विमानों का सिलसिला शुरू हो गया। शाम से ही लाग विमानों का इंतजार कर रहे श्रद्धालु भी चैतन्य हो उठे। झांकियों का सिलसिला पिशाचमोचन से शुरू हुआ चौरछठवा, बेनिया मोड़ होते हुए चेतगंज चौराहे पर पहुंचा। लाग विमानों के ऊपर मां काली व मां दुर्गा के मुखौटे, राक्षस, नरमुंड, भूत पिशाच और अजीबो गरीब वस्त्र धारण किए हुए पात्र।
तलवार भांजते हुए, हवा में लटके हुए बच्चे। घूमती हुई गर्दन, चंद्रयान की झांकी, राष्ट्रभक्ति का संदेश देते हुए झांकियां जब निकलीं तो पूरा मेला भी गुलजार हो उठा। लहुराबीर से लेकर चेतगंज तक सड़क के दोनों किनारे, गलियों में लोग रात भर झांकियों के आने का इंतजार कर रहे थे। जैसे-जैसे झांकियां गुजर रही थीं श्रद्धालुओं का उत्साह देखते ही बन रहा था। इस दौरान लीला समिति के अजय गुप्ता बच्चू, तनुज पांडेय, राजू यादव, विजय मिश्रा, प्रवीण त्रिपाठी मौजूद रहे।
महिलाओं और बच्चों की रही भीड़
चेतगंज की नक्कटैया में करवाचौथ का पूजन करने के बाद दंपती भी घूमने निकले। खासकर बच्चों और महिलाओं की भीड़ सबसे ज्यादा रही। सड़क के दोनों तरफ सजी खिलौनों, झूलों और खाने-पीने की दुकानों पर जमकर खरीदारी हुई। मिट्टी के बर्तन, धनुष-बाण, तलवार और गदा की खरीदारी भी बच्चों ने की।
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