Raj Bhavan Himachal: लोकतंत्र प्रहरी विधेयक पर सरकार के जवाब से संतुष्ट नहीं राजभवन, पूछा था कारण

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Loktantra Prahari Samman Bill in Raj Bhavan Himachal Pradesh

राजभवन
– फोटो : अमर उजाला

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लोकतंत्र प्रहरी विधेयक पर राज्य सरकार के जवाब से राजभवन संतुष्ट नहीं है। इस विधेयक को एक बार फिर से राज्य सरकार को लौटाने की तैयारी है। राज्यपाल शिव प्रताप शुक्ल ने सरकार से इस निरसन (रिपीलिंग) विधेयक को पारित करने और इस प्रावधान को खत्म करने का कारण पूछा था। सुक्खू सरकार ने विधानसभा में इस विधेयक के निरसन का प्रस्ताव रखते वक्त तर्क दिया था कि इसका लाभ विचारधारा विशेष से जुड़े राजनीतिक लोगों को दिया जा रहा है।

ऐसा ही जवाब राजभवन शिमला को भी दिया गया है। जयराम सरकार के वक्त में हिमाचल प्रदेश लोकतंत्र प्रहरी सम्मान विधेयक 2021 पारित किया गया तो इसे मंजूरी के लिए राज्यपाल बंडारू दत्तात्रेय को भेजा गया। इसे स्वीकृति मिलने के साथ विधि विभाग ने 18 मई, 2021 को इसकी अधिसूचना जारी की। इस अधिसूचना के अनुसार आपातकाल के दौरान राजनीतिक और सामाजिक कारणों के लिए आंतरिक सुरक्षा अधिनियम 1971 या भारत रक्षा अधिनियम 1971 के तहत जेल या पुलिस थाने में बंद होने वाले लोगों के लिए यह प्रावधान किया गया।

यह सम्मान राशि लोकतंत्र प्रहरी के अलावा मृतक पति या पत्नी को देने की व्यवस्था है। पूर्व भाजपा सरकार ने आपातकाल के समय जेल में रहने वाले नेताओं की अलग-अलग दो श्रेणियों को 20 हजार रुपये और 12 हजार रुपये प्रति माह सम्मान राशि देने का प्रावधान किया। उस वक्त तर्क दिया गया कि आपातकाल यानी 25 जून, 1975 से 21 मार्च, 1977 तक बहुत से लोगों ने लोकतंत्र के अस्तित्व को बचाने और जनता के मौलिक अधिकारों के लिए संरक्षण के लिए संघर्ष किया।

उन्हें सम्मान राशि देने का निर्णय लिया गया है। इसके बाद सरकार बदली तो मुख्यमंत्री सुखविंद्र सिंह सुक्खू ने बजट सत्र में लोकतंत्र प्रहरी सम्मान निरसन विधेयक को पारित करने का प्रस्ताव सदन में रखा। भाजपा के हंगामे और वाकआउट के बीच इसको पारित कर दिया गया। फिर विधेयक राज्यपाल की मंजूरी के लिए भेजा गया। राज्यपाल ने इसे सरकार को भेजा और पूछा कि क्यों यह विधेयक निरस्त होना चाहिए। अब जवाब से दोबारा असंतोष जताते हुए इसे फिर सरकार को स्पष्ट जवाब देने के लिए लौटाया जा रहा है।

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