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Ram Mandir
– फोटो : Social Media
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श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन के समय देहरादून के प्रमुख कारसेवकों में विजय स्नेही का भी नाम है। उस वक्त उन्हें घर तो छोड़ना ही पड़ा, जेल की हवा भी खानी पड़ी। जब वह जेल में थे तो उन्हें अपनी मां की मृत्यु का समाचार मिला। वह मां की अंतिम यात्रा में शामिल नहीं हो सके थे इसका उन्हें जितना मलाल है उतना ही राममंदिर बनने से आनंद भी है।
स्नेही वर्ष 1990 की यादें ताजा कर रहे हैं। उस वक्त राम जन्मभूमि आंदोलन चरम पर था। स्नेही देहरादून के उन चुनिंदा लोगों में शामिल रहे जिन्होंने इस पूरे घटनाक्रम को न सिर्फ अपनी आंखों से देखा बल्कि अपने आराध्य को स्थान दिलाने की उस जंग में उन्हें जेल भी जाना पड़ा। स्नेही को श्रीराम कार सेवा समिति के दून नगर संयोजक बनाया गया था। आंदोलन के समय वह नौ दिन तक टिहरी जेल में बंद रहे थे।
देहरादून में उन्होंने अन्य लोगों के साथ मिलकर सत्याग्रह किया। झंडेजी के आसपास सत्याग्रह करते हुए अपनी गिरफ्तारी दी थी। बताया कि तब पुलिस कोतवाली लेकर आई। वहां से रेसकोर्स और फिर गाड़ी में बिठाकर टिहरी जेल लेकर गई थी।
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