Ram Mandir: खिलाड़ी बनकर निकले कार सेवा करने, अयोध्या तक दिया था पुलिस को चकमा

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Came out as a player to service cars dodged police till Ayodhya

बाएं से सबल सिंह और भगवंत सिंह।
– फोटो : अमर उजाला।

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30 अक्तूबर 1990। राम मंदिर आंदोलन में विश्व हिंदू परिषद के आह्वान पर गोरखपुर से भारी संख्या में कारसेवक अलग- अलग जत्था बनाकर अयोध्या के लिए निकले थे। इसमें एक जत्था ऐसा था जिसके सभी सदस्य पुलिस को चकमा देने के लिए फुटबाल खिलाड़ी बनकर निकले थे।

रास्ते में पुलिस को चकमा देने में कामयाब भी हुए। लेकिन, अयोध्या से कुछ दूरी पहले ही पुलिस ने उन्हें रोक लिया। उनके द्वारा प्रतियोगिता में भाग लेने के लिए बताए गए गांव की तस्दीक कराई, जिससे मामला पकड़ में आ गया। पुलिस ने दोबारा न आने की हिदायत देकर छोड़ा। उस जत्थे में शामिल लोगों को अयोध्या न पहुंच पाने का मलाल हु हमेशा रहा, लेकिन अब राम मंदिर निर्माण से उस दौरान की निराशा खुशी में बदल गई है।

कारसेवकों में शामिल सबल सिंह बताते हैं, गगहा ब्लॉक के गगहा गांव से 10 लोगों का एक जत्था अयोध्या जाने के लिए तैयार हुआ। सबने तय किया कि वे लोग साइकिल से निकलेंगे। एक स्थान पर साइकिल रखकर पैदल अयोध्या जाएंगे। तय हुआ कि करीब 20 किलो मीटर दूर नेवास गांव पहुंच कर रात्रि विश्राम करेंगे।

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26 अक्तूबर को जब हम लोग निकलने लगे तो मां ने थाली में दही-चंदन और रोरी का टीका लगाकर सभी कारसेवकों को विदा किया। इसमें उनका बेटा सबल सिंह भी शामिल था। तय रणनीति के तहत नेवास गांव में रात्रि विश्राम किए। दूसरे दिन ढेबरा गांव पहुंचे और वहां पर साइकिल रख कर पैदल ही अयोध्या के लिए रवाना हो गए। उस दौरान ग मेरी उम्र 19 साल थी। तीसरे दिन न बस्ती जिले के एक गांव के मंदिर में जाकर रुक गए। भोर में उठे और मंजिल की तरफ बढ़ने लगे। एक गांव पार कर रहे थे तब पता चला कि आगे रास्ते पर पुलिस ने नाकेबंदी कर दी है। हम गांव में ही रुक गए। दो रात तक वहीं ठहरे रहे।

 

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