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Ram Mandir
– फोटो : Amar Ujala/Sonu Kumar
विस्तार
जैसे-जैसे अयोध्या में राम मंदिर के शुभारंभ का दिन नजदीक आता जा रहा है, अयोध्या धाम में उत्साह और उत्सुकता बढ़ती जा रही है। सिर्फ सरकारी तंत्र ही नहीं, बल्कि अयोध्या में भगवान राम से अपना नाता रखने वाले देश और दुनिया के अलग-अलग देशों के लोग तमाम तरह के उपहारों को भेजने की शुरुआत भी कर चुके हैं। शनिवार को जब प्रधानमंत्री मोदी अयोध्या में महर्षि वाल्मीकि अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे और अयोध्या धाम रेलवे जंक्शन का शुभारंभ कर रहे थे, तो नेपाल के जनकपुरी से चार हजार लीटर जल लेकर लोग पहुंचे। यही नहीं छत्तीसगढ़ से भगवान राम के ननिहाल चंदखुरी से शगुन के चावल भी भेजे गए। जानकारी के मुताबिक भगवान राम की ससुराल जनकपुरी से लेकर उनके ननिहाल और उनके वंशजों की ओर से कई तरह के उपहार की सूची तैयार कर अयोध्या धाम भेजे जाने की शुरुआत कर दी गई है।
अयोध्या में राम मंदिर का शुभारंभ तो 22 जनवरी को होना है, लेकिन उसकी भव्य तैयारियां अयोध्या में लगातार जारी है। इन्हीं तैयारी की कड़ी में देश और दुनिया के अलग-अलग हिस्सों से अयोध्या में भगवान राम और माता जानकी के लिए उपहार की झड़ी लग रही है। शनिवार को नेपाल के जलकलैया बारा से आए कुणाल और उदघोष ने अमर उजाला डॉट कॉम को बताया कि वह नेपाल की सात बड़ी नदियों के जल से प्रवाहित होने वाली सप्तकोशी नदी का चार हजार लीटर जल लेकर अयोध्या पहुंचे हैं। वह कहते हैं कि इस जल में तमाकोशी, दूधकोशी, अरुणकोशी, भोटेकोशी, तमूरकोशी, इंद्रावती और सुनकोशी नदियों का जल शामिल है। कुणाल कहते हैं कि अभी इन पवित्र नदियों के जल के बाद माता जानकी के लिए उनके मायके जनकपुरी से वस्त्र आभूषण, मिठाई और ग्यारह तरह के पकवान भेजे जाएंगे। जनकपुरी के माता जानकी मंदिर से जलकलैया बारा आश्रम के सन्यासी और माता जानकी के वंशज 20 जनवरी को ही अयोध्या पहुंच जाएंगे।
इसके अलावा प्रभु श्रीराम के ननिहाल छत्तीसगढ़ के चंदखुरी से शगुन के चावल भी अयोध्या भेजे जा रहे हैं। ननिहाल छत्तीसगढ़ से आने वाले चावल और ससुराल नेपाल से आने वाले मेवों से भरे थाल का विशेष भोग तैयार किया जाना है। छत्तीसगढ़ के राइस मिलर्स एसोसिएशन के संयुक्त सचिव प्रभाकर दास बताते हैं कि उनकी एसोसिएशन की ओर से भी इस प्रसाद के लिए योगदान दिया गया है। इसमें छत्तीसगढ़ के प्रत्येक जिले का थोड़ा-थोड़ा चावल भी शामिल है। मंदिर निर्माण कमेटी के अनिल मिश्र कहते हैं कि प्रभु श्रीराम के लिए जो श्रद्धा और आस्था देश दुनिया के अलग-अलग हिस्सों में दिख रही है, वह न सिर्फ अद्भुत है बल्कि अपार है। वह कहते हैं कि प्रभु श्रीराम के चरणों में अलग-अलग जगह से कई तरह के उपहार पहुंच रहे हैं।
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