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राम मंदिर का मुस्लिम समाज ने किया स्वागत
– फोटो : अमर उजाला
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बिहार के सीवान में मुस्लिम समाज के लोगों ने 22 जनवरी को होने वाली राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा का स्वागत किया है। जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम बंधुओं ने अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की है। उन्होंने कहा कि हिंदू भाइयों का हम लोग स्वागत करते हैं। उनकी राम मंदिर में अपनी आस्था है। हमें कोई दिक्कत नहीं है। हम सभी लोग मिलजुल कर भाईचारे के साथ रहें।
दरअसल, पूरे देश में अयोध्या में 22 तारीख को होने वाले राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा की चर्चा जोरों पर है। वहीं, इसे लेकर पूरे देश को हाई अलर्ट पर रखा गया है कि किसी तरह की अफवाह न फैले और आसामाजिक तत्व अपनी नापाक हरकत करने में कहीं कामयाब न हो जाएं।
‘हम सभी लोग मिलजुल कर साथ रहें’
जानकारी के मुताबिक, सीवान जिले में जुमे की नमाज के बाद मुस्लिम समाज के लोगों ने अयोध्या में 22 तारीख को होने वाले राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा को लेकर कहा कि हिंदू भाइयों का हम लोग स्वागत करते हैं। उनका स्वागत है और उनकी राम मंदिर में अपनी आस्था है। वहां कुछ भी हो हमें कोई दिक्कत नहीं है, न ही कोई लेना देना है। हम सभी लोग मिलजुल कर भाईचारे के साथ रहें। वहीं, उन्होंने कहा कि देश तरक्की करे, उसके बारे में हमें सोचना चाहिए। यह राजनीतिक पार्टियों का हथकंडा है। हम लोगों को कोई दिक्कत नहीं है। हम लोग एक साथ हैं।
शेख मोहल्ला स्थित ग्यारहवीं मस्जिद के मौलाना अफसर रजा ने कहा कि मेरा देश हिंदुस्तान है और हम लोग अपने देश से कभी गद्दारी नहीं कर सकते। हम इस देश के नागरिक हैं, मुझे अपना देश पसंद है। सभी लोग खुशी के साथ और अमनचैन से रहें, यही हम लोग चाहते हैं।
‘सीवान जिला हेमशा रहा कौमी एकता का प्रतीक’
वहीं, जावेद आलम ने कहा कि देश की हुकूमत का यह एलान है, मेरे लिए कोई दिक्कत की बात नहीं है। हम लोग सभी देश वासियों से यह आग्रह करते हैं कि सभी लोग अमन चैन और भाईचारा बना कर रहें, ताकि अपना देश तरक्की कर सके। जुमे के दिन हैं, मस्जिदों में बड़ी संख्या में नमाजियों की भीड़ होती है और शेख मोहल्ला स्थित ग्यारहवीं मस्जिद सीवान शहर की बहुत पुरानी मस्जिद है। उन्होंने कहा कि सीवान जिला हेमशा कौमी एकता का प्रतीक रहा है।
दरअसल, सीवान जिला फिर एक बार कौमी एकता का परिचय देते हुए देश में एक बड़ा संदेश देने का काम किया है। बता दें कि सीवान देश के प्रथम राष्ट्रपति राजेंद्र बाबू की धरती और मौलाना मजहरुलहक साहब की धरती है। जहां हिंदुओं के त्योहार में मुस्लिम शरीक होते हैं। वही, ईद जैसे त्योहार में हिंदू भाई घर जाकर सेवइयां खाते हैं। ईद में सेंवई खाना हो या होली में मुस्लिमों के द्वारा प्रसाद खाना, यह साबित करता है कि यहां आपसी भाईचारा मजबूती के साथ बना हुआ है।
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