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बाबरी ढांचा विध्वंस के दौरान की फोटो
– फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या में श्री राम जन्मभूमि/बाबरी मस्जिद विवाद में विवादित ढांचा ढहाए जाने के बाद तत्कालीन डीएम और कप्तान को सस्पेंड कर दिया गया था। घटना को लेकर कुल 49 एफआईआर दर्ज की गई थीं। वर्ष 1990 में गोली चलवाए जाने का आरोप तत्कालीन डीएम पर मढ़ने की कोशिश की गई थी।
22 जनवरी 2024 को प्राण प्रतिष्ठा समारोह के कुछ साल पहले का अतीत अयोध्या में सभी के लिए कष्टदायी रहा है। वह जो कथित मस्जिद को ढहाने में आरोपी थे, नागरिक थे, और वह भी जो उस समय यहां अहम पदों पर थे। दो अक्तूबर और 30 नवंबर 1990 का मंजर किसी दूसरे राष्ट्र के साथ युद्ध जैसा था।
वर्ष 1990 में विहिप ने 30 अक्तूबर को देशभर से कारसेवकों को अयोध्या बुलाया था। लाखों कारसेवक पहुंच गए। प्रशासन ने अयोध्या को आबाद क्षेत्र का टापू बना दिया था। सवाल-जवाब के बजाय कारसेवकों को गोली मारने का आदेश कर दिया गया था।
परिंदा पर नहीं मार सकता कि चुनौती को हवा में उड़ाने के लिए सुरक्षा घेरे को ध्वस्त कर जुनूनी कारसेवक विवादित ढांचे के पास तक पहुंचने में कामयाब हो गए। झंडा फहराने की कोशिश की। सुरक्षा बलों ने जगह-जगह ताबड़तोड़ फायरिंग की। आखिरकार कई कारसेवकों की मौत हो गई। कई घायल हो गए। मौत से कारसेवक उग्र हो गए थे। उन्हें रोक पाना अब किसी के वश की बात नहीं रह गई थी।
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