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janakpuri varanasi
– फोटो : अमर उजाला
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सप्तपुरियों के बाद काशी में जनकपुरी का भी पता चल गया है। प्रमाणों के आधार पर काशी की जनकपुरी खोजवां में है। 25 दिनों की खोज और 15 पुस्तकों के अध्ययन के बाद काशी के विद्वानों ने इसे प्रमाणित भी कर दिया है। मंदिर की खोदाई में निकले प्रमाण आज भी मौजूद हैं। इसके मुताबिक, राजा जनक ने यहीं पर तपस्या की और मिथिलेश्वर शिवलिंग को स्थापित किया।
काशी में मिली जनकपुरी की दूरी दशाश्वमेध क्षेत्र स्थित काशी की अयोध्यापुरी से छह किलोमीटर दक्षिण पश्चिम में है। मूल अयोध्या से जनकपुरी भी दक्षिण पश्चिम दिशा में बसी है। वहां आसपास अनेक कुंड और तीर्थ हैं। खोजवां भी अनेक तीर्थ और कुंड मौजूद हैं। जनकपुरी की यह स्थिति सिद्ध करती है कि यही काशी की जनकपुरी है।
बीएचयू के प्रो. माधव जनार्दन रटाटे और ब्राह्मण महासभा के अजय शर्मा ने बताया कि त्रेतायुग में शिवभक्त राजा जनक ने शिव आराधना करके काशी की जनकपुरी में शिवलिंग स्थापित किया था। इसे मिथिलेश्वर महादेव के नाम से जाना जाता है। वर्तमान में यह शिवलिंग शुष्केश्वर महादेव मंदिर के प्रांगण में विराजमान हैं। शुष्केश्वर के पश्चिम में जनकेश्वर या मिथिलेश्वर शिवलिंग हैं। यह शिवलिंग पश्चिम की ओर मुखवाला है।
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