[ad_1]
Rama Ekadashi 2022: रमा एकादशी व्रत के लाभ
रमा एकादशी व्रत के लाभ यह व्रत संतान, सुख, समृद्धि, धन की कामना रखने वाले मनुष्यों को अवश्य करना चाहिए.
इस व्रत के प्रभाव से जीवन के सारे अभाव दूर हो जाते हैं.
अनजाने में किए गए पापों का क्षय होता है.
अनजाने में किए गोहत्या, ब्रह्म हत्या के पाप से मुक्ति मिलती है.
सुख-सौभाग्य की प्राप्ति होती है.
स्त्री पुरुष दोनों यह व्रत रखें तो पारिवारिक सुख सौहार्द्र बना रहता है.
उत्तम वाहन, संपत्ति सुख प्राप्त होता है.
मृत्यु के पश्चात विष्णुलोक की प्राप्ति होती है.
ये काम जरूर करें
इस दिन छोटे बच्चों को शिक्षा से संबंधित वस्तुएं दान करनी चाहिए. कहते हैं इससे मां लक्ष्मी के साथ देवी सरस्वती का आशीर्वाद प्राप्त होता है और धन, विद्या में बढ़ोत्तरी होती है. जूते-चप्पल देना भी अत्यंत लाभकारी होता है.
रमा एकादशी पर दान
रमा एकादशी पर जरूरतमंदों को कंबल, गर्म कपड़ों का दान करें, क्योंकि शरद पूर्णिमा के बाद से मौसम में ठंडक घुल जाती है ऐसे में एकादशी के दिन इन चीजों का दान जीवन में सुख-सौभाग्य लाता है.
एकादशी पर किया दान
एकादशी पर किया दान हजार गायो के दान के समान माना जाता है. इस दिन गरीबों को भोजन कराना या फिर अन्न(चावल, शक्कर, दाल, आटा) का दान देना शुभ फलदायी होता है. इससे मां लक्ष्मी प्रसन्न होती हैं.जातक की आय में वृद्धि होती है.
रमा एकादशी पर शुक्ल योग
रमा एकादशी पर शुक्ल योग बन रहा है जो शुभ कार्य के लिए उत्तम माना जाता है. इसमें भगवान विष्णु की पूजा करने से बैकुंठ की प्राप्ति होती है. शुक्ल योग 20 अक्टूबर 2022 को शाम 05.53 से शुरू होकर 21 अक्टूबर 2022 को शाम 05.48 पर खत्म होगा.
रमा एकादशी व्रत कथा
पौराणिक कथा के अनुसार एक नगर के राजा मुचुकुंद ने पुत्री चंद्रभागा की शादी राजा चंद्रसेन के बेटे शोभन के साथ कर दी. शारीरिक रूप से शोभन बहुत दुर्बल था. वह एक समय भी अन्न के बिना नहीं रह सकता था. कार्तिक माह में दोनों राजा मुचुकुंद के यहां गए उस समय रमा एकादशी थी. पिता के राज्य में रमा एकादशी का व्रत मनुष्य के साथ पशु भी करते थे. चंद्रभागा चिंतित थी क्योंकि पति भूखा नहीं रह सकता था, इसलिए उसने शोभन से दूसरे राज्य में जाकर भोजन ग्रहण करने को कहा.
रमा एकादशी का विशेष महत्व
दिवाली से पहले रमा एकादशी का विशेष महत्व है. कार्तिक माह की रमा एकादशी 20 अक्टूबर 2022 को शाम 04.04 बजे शुरू होगी और समापन 21 अक्टूबर 2022 को शाम 05.22 पर होगा. व्रत का पारण 22 अक्टूबर 2022 को प्रात: 06.30 – 08.47 तक किया जाएगा.
[ad_2]
Source link