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प्रतीकात्मक तस्वीर।
– फोटो : Istock
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रामचरितमानस की प्रतियां फाड़कर जलाने के मामले में जिन पांच आरोपियों पर राष्ट्रीय सुरक्षा कानून (रासुका) लगा था उस पर अब एडवाइजरी बोर्ड की भी मुहर लग गई है। बोर्ड ने इस अपराध को गंभीर माना है।
सपा एमएलसी स्वामी प्रसाद मौर्य ने रामचरितमानस की चौपाइयों पर सवाल उठाए थे। इसके बाद लखनऊ के वृंदावन कॉलोनी में 29 जनवरी को कुछ लोगों ने रामचरितमानस की प्रतियां फाड़कर जलाई थीं। उनकी फोटो और वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुई तो पीजीआई पुलिस ने एफआईआर दर्ज की थी। स्वामी प्रसाद को भी साजिश का आरोपी बनाया था।
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पुलिस ने प्रकरण में एक सप्ताह के भीतर चार्जशीट दाखिल कर दी थी। पांच फरवरी को पांच आरोपियों पर रासुका लगाया था। इनमें साउथ सिटी के देवेंद्र प्रताप यादव, कृष्णानगर के यशपाल सिंह, सैनिक नगर के सतेंद्र कुशवाहा, तेलीबाग के सुरेश सिंह व उतरेठिया के मो. सलीम शामिल हैं। रासुका की फाइल एडवाइजरी बोर्ड में रखी गई। बोर्ड ने इस पर मुहर लगा दी।
बोर्ड में हाईकोर्ट के जज, डीएम लखनऊ व पुलिस कमिश्नर शामिल हैं। पुलिस ने कुल दस आरोपियों पर मुकदमा दर्ज किया था। पांच पर रासुका के अलावा इनमें स्वामी प्रसाद, सुजीत यादव, महेंद्र प्रताप, एसएस यादव व संतोष वर्मा भी शामिल थे। इनको कोर्ट से राहत मिल गई थी। लिहाजा गिरफ्तारी नहीं की गई, लेकिन चार्जशीट लगा दी गई है।
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