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स्क्रब टाइफस(सांकेतिक)
– फोटो : अमर उजाला
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हिमाचल प्रदेश में स्क्रब टायफस के मामले बढ़ते जा रहे हैं। अब तक इस बीमारी के 5,218 टेस्ट किए गए हैं। जिनमें 723 मरीज पॉजिटिव पाए गए हैं। पांच लोगों की मौत हो चुकी है। स्थिति को देखते हुए सरकार ने प्रदेश के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षकों को दवाइयों का स्टॉक रखने के लिए कहा है। रोकथाम और उपचार के लिए शिक्षण संस्थानों में भी विद्यार्थियों को जानकारी देने के लिए कहा गया है।
स्क्रब टायफस एक मौसमी जूनोटिक (पशु जन्य रोग) बीमारी है। आमतौर पर बरसात के मौसम में तेज बुखार के रोगियों की संख्या बढ़ जाती है। जिसके अधिकांश मामले बरसात के मौसम में होते हैं, जो घास काटने और सेब के मौसम के साथ मेल खाता है। यह रोग एक जीवाणु विशेष (रिकेट्सिया) से संक्रमित पिस्सू (माइट) के काटने से फैलता है।
यह जीवाणु चमड़ी के माध्यम से शरीर में प्रवेश करता है और स्क्रब टायफस बुखार पैदा करता है। इससे जोड़ों में दर्द और कंपकंपी के साथ बुखार महसूस होता है। शरीर में ऐंठन, अकड़न या शरीर टूटा सा लगता है। राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन के निदेशक सुदेश मोक्टा ने कहा कि वर्तमान परिस्थिति को ध्यान में रखते हुए प्रदेश के सभी मुख्य चिकित्सा अधिकारियों और वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षकों को दवाइयों के भंडारण करने के निर्देश दिए हैं।
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