Shimla: कसौली छावनी में अतिक्रमण पर हाईकोर्ट सख्त, रिकॉर्ड किया तलब

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High Court strict on encroachment in Kasauli Cantonment, recorded summons

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट
– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने कसौली छावनी में अतिक्रमण पर कड़ा संज्ञान लिया है। अदालत ने छावनी में किए गए अवैध कब्जों का पूरा रिकॉर्ड तलब किया है। इसके अलावा अदालत ने केंद्र सरकार को जवाब दायर करने के लिए एक हफ्ते का समय दिया है। कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश तरलोक सिंह चौहान और न्यायाधीश वीरेंदर सिंह की खंडपीठ ने मामले की सुनवाई 23 मई को निर्धारित की है। स्थानीय निवासी भावना ने कसौली के पाइन मॉल में अतिक्रमण मामले में जनहित याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि पाइन मॉल में 21 दुकानों का अवैध निर्माण किया गया है।

यह क्षेत्र भारतीय सेना के अधीन आता है। इस जमीन पर किसी भी तरह का निर्माण करने के लिए कोई नियम नहीं है। दलील दी गई कि याचिकाकर्ता का इस मामले में कोई भी व्यक्तिगत लाभ नहीं है। भारतीय सेना के हित में इस अतिक्रमण को हटाया जाना अति आवश्यक है। याचिकाकर्ता ने अदालत से गुहार लगाई कि सेना की इस जमीन को खाली करवाया जाए। पाइन मॉल में बनी इन 21 दुकानों को तुरंत गिराने के आदेश पारित करने की गुहार भी लगाई गई है।

चुराह से भाजपा विधायक को 20-20 हजार के मुचलके पर मिली जमानत

वहीं, अधिवक्ताओं पर आपत्तिजनक टिप्पणी के मामले में मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी चंबा सुभाष चंद्र भसीन की अदालत ने पूर्व उपाध्यक्ष एवं चुराह के वर्तमान विधायक को दो शिकायतों पर 20-20 हजार के दो मुचलकों पर जमानत दी है। अब उन्हें 29 सितंबर को न्यायालय में पेश होना कोगा। वीरवार सुबह 10 बजे विधायक मुख्य न्यायिक दंडाधिकारी की अदालत में पेश होने के लिए पहुंचे। सुबह 11:00 बजे न्यायालय में प्रस्तुत हुए। यहां से उन्हें जमानती मुचलके पर जमानत मिली। चुराह क्षेत्र में साल 2020 में एक जनसभा में तत्कालीन विधानसभा उपाध्यक्ष ने चंबा के अधिवक्ताओं को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की थी। अपने ही विधानसभा क्षेत्र से संबंधित और चंबा में वकालत करने वाले दो अधिवक्ताओं का नाम लेते हुए टिप्पणी की थी। मामले में अधिवक्ताओं ने गेट मीटिंग कर आंदोलन किया था। इसके बाद जिला बार एसोसिएशन की अगुवाई में दोनों अधिवक्ताओं ने दो आपराधिक शिकायतें दायर की थीं। विधायक हंसराज ने बताया कि अदालत से उन्हें जमानत मिली है। न्यायालय और जिला बार एसोसिएशन के प्रति मान-सम्मान है। वह हर बार कानून के शासन-व्यवस्था की बात करते हैं।

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