Shimla: तकलुंग चेतुल रिंपोछे के चौथे पुनरावतार ताशी को दी निंगमा स्कूल प्रमुख की पदवी

[ad_1]

चौथे पुनरावतार नवांग ताशी राप्टेन

चौथे पुनरावतार नवांग ताशी राप्टेन
– फोटो : अमर उजाला

ख़बर सुनें

तिब्बती बौद्ध धर्म के निंगमा स्कूल के प्रमुख तकलुंग चेतुल रिंपोछे के चौथे पुनरावतार नवांग ताशी राप्टेन को स्कूल के प्रमुख की पदवी दी गई। लाहौल-स्पीति के ताबो में सेरकोंग पब्लिक स्कूल के चार साल सात महीने और 12 दिन के नर्सरी कक्षा के छात्र ताशी को औपचारिक तौर पर गुरु बनाया गया है। ताशी का जन्म 16 अप्रैल, 2018 को हुआ है। सोमवार को राजधानी शिमला के पंथाघाटी में दोरजीडक मठ में तिब्बती बौद्ध धर्म के अनुसार उनका वस्त्र धारण और मुंडन संस्कार हुआ।

स्पीति घाटी के ताबो क्षेत्र के रंगरीक गांव के ताशी की पहचान तिब्बती बौद्ध धर्म के निंगमा स्कूल के प्रमुख तकलुंग चेतुल रिंपोछे के चौथे पुनरावतार के रूप में की गई। रिंपोछे की मौत सात साल पहले 24 दिसंबर, 2015 को हुई थी। मठ में लाहौल-स्पीति, किन्नौर, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, भूटान और नेपाल से आए बौद्ध शिष्यों ने ताशी का स्वागत किया। दोरजीडक मठ के बौद्ध भिक्षु शेडूप मिफम ने बताया कि वह यहां अपनी धार्मिक शिक्षा शुरू करेंगे।  

बौद्ध गुरु पहुंचे थे घर
ताशी के दादा छेतन अंगचुक ने बताया कि उन्हें खुशी है कि उनके घर में तकलुंग चेतुल रिंपोछे का पुनरावतार मिला है। मीडिया में कहा कि बौद्ध भिक्षु ढूंढने के लिए बौद्ध गुरु उनके घर आए थे। उन्हें जब इसका पता चला तो उन्हें बहुत खुशी हुई। उनका पोता कहता रहता था कि उसके दो कुत्ते शिमला में हैं। 

सात साल से लोग कर रहे थे इंतजार
बौद्ध अनुयायी व हिमाचल सरकार के अधिकारी जीएस नेगी ने बताया कि पुनरावतार से लोग काफी खुश हैं। पिछले सात साल से लोग इसका इंतजार कर रहे थे। देश भर से अनुयायी उनका आशीर्वाद लेने यहां आ रहे हैं। 

विस्तार

तिब्बती बौद्ध धर्म के निंगमा स्कूल के प्रमुख तकलुंग चेतुल रिंपोछे के चौथे पुनरावतार नवांग ताशी राप्टेन को स्कूल के प्रमुख की पदवी दी गई। लाहौल-स्पीति के ताबो में सेरकोंग पब्लिक स्कूल के चार साल सात महीने और 12 दिन के नर्सरी कक्षा के छात्र ताशी को औपचारिक तौर पर गुरु बनाया गया है। ताशी का जन्म 16 अप्रैल, 2018 को हुआ है। सोमवार को राजधानी शिमला के पंथाघाटी में दोरजीडक मठ में तिब्बती बौद्ध धर्म के अनुसार उनका वस्त्र धारण और मुंडन संस्कार हुआ।

स्पीति घाटी के ताबो क्षेत्र के रंगरीक गांव के ताशी की पहचान तिब्बती बौद्ध धर्म के निंगमा स्कूल के प्रमुख तकलुंग चेतुल रिंपोछे के चौथे पुनरावतार के रूप में की गई। रिंपोछे की मौत सात साल पहले 24 दिसंबर, 2015 को हुई थी। मठ में लाहौल-स्पीति, किन्नौर, लद्दाख, अरुणाचल प्रदेश, भूटान और नेपाल से आए बौद्ध शिष्यों ने ताशी का स्वागत किया। दोरजीडक मठ के बौद्ध भिक्षु शेडूप मिफम ने बताया कि वह यहां अपनी धार्मिक शिक्षा शुरू करेंगे।  

बौद्ध गुरु पहुंचे थे घर

ताशी के दादा छेतन अंगचुक ने बताया कि उन्हें खुशी है कि उनके घर में तकलुंग चेतुल रिंपोछे का पुनरावतार मिला है। मीडिया में कहा कि बौद्ध भिक्षु ढूंढने के लिए बौद्ध गुरु उनके घर आए थे। उन्हें जब इसका पता चला तो उन्हें बहुत खुशी हुई। उनका पोता कहता रहता था कि उसके दो कुत्ते शिमला में हैं। 

सात साल से लोग कर रहे थे इंतजार

बौद्ध अनुयायी व हिमाचल सरकार के अधिकारी जीएस नेगी ने बताया कि पुनरावतार से लोग काफी खुश हैं। पिछले सात साल से लोग इसका इंतजार कर रहे थे। देश भर से अनुयायी उनका आशीर्वाद लेने यहां आ रहे हैं। 



[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *