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शिमला आना पड़ता है परीक्षा की कोचिंग लेने के लिए
मंडी में कोचिंग सेंटरों की कमी है। ज्यादातर प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी करने वाले विद्यार्थियों को शिमला आना पड़ता है। सीएम से बात करनी थी पर कर नहीं पाई। भविष्य में मौका मिला तो जरूर मन के सवालों को सामने रखूंगी।– चेतना कुमारी, बारहवीं टॉपर, मंडी।
हर स्कूल में हो उच्च स्तरीय प्रयोगशाल
क्षेत्र में विज्ञान प्रयोगशाला की कमी है। जिसकी वजह से विद्यार्थी लैब में होने वाले प्रयोगों को सीखने में पिछड़ जाते हैं। सरकार चाहे तो यह स्थिति सुधार सकती है। हर स्कूल में उच्च स्तरीय लैब खोली जानी चाहिए। -शिवेंद्र शर्मा, दसवीं टॉपर, हमीरपुर
फीस के मुकाबले सुविधा नहीं मिलती
पहले ही कोचिंग सेंटर कम हैं। उनमें फीस के मुकाबले सुविधा नहीं दी जाती। इसलिए मजबूरन दूसरी बाहरी राज्यों में कोचिंग के लिए जाना पड़ता है। हिमाचल में बेहतर संस्थान खुले तो विद्यार्थियों को फायदा होगा।– वंशिका धीमान, बारहवीं टॉपर, ऊना
सम्मान पाकर मिली खुशी
प्रदेश मुख्यमंत्री के हाथों से मेधावी का सम्मान पाकर बहुत खुशी मिली है। इसके लिए सात से आठ घंटे का सफर तय करके शिमला पहुंची हूं। भविष्य में मैं भी अपने पिता की तरह हिंदी प्राध्यापिका बनना चाहती हूं।– दीक्षा कठियाल, दसवीं टॉपर, हमीरपुर
भविष्य में चुनना चाहती है बैकिंग का क्षेत्र
कभी सोचा नहीं था कि इतने बड़े मंच पर उन्हें सम्मानित किया जाएगा। अभी कांगड़ा से बीबीए की पढ़ाई कर रही हूं। भविष्य में बैंकिग के क्षेत्र में आगे बढ़ना चाहती है। सम्मान पाकर हौसला बढ़ा है।– कनिष्का पटियाल, बारहवीं टॉपर, कांगड़ा
सीए बनना चाहती है वृदा
बारहवीं विज्ञान संकाय की मेरिट में पहला रैंक पाने वाली वृंदा ने कहा कि वह आगे चलकर सीए बनना चाहती हैं। आज सम्मनित होने से आगे बढ़ने के लिए और ज्यादा हिम्मत मिली है। अब और मेहनत करूंगी।– वृंदा, बारहवीं टॉपर, सिरमौर
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