Shimla News: सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद हाईकोर्ट ने दोषी ठहराया चरस रखने का आरोपी

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कोर्ट(सांकेतिक)

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– फोटो : अमर उजाला

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हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद मंडी के गुड्डू राम को चरस रखने का दोषी ठहराया है। खंडपीठ ने आरोपी को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इससे पहले सत्र न्यायाधीश मंडी ने आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया। आरोपी को एक अगस्त 2008 को चरस रखने के लिए दोषी ठहराया गया था। इस निर्णय को आरोपी ने अपील के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 26 जून 2014 को आरोपी की अपील स्वीकार करते हुए उसे बरी कर दिया था। इस फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2022 को सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट को दोबारा से मामले पर सुनवाई के आदेश दिए थे। इन आदेशों की अनुपालना में दोबारा से मामले पर सुनवाई की गई। 

अभियोजन पक्ष के अनुसार 10 फरवरी 2007 को आरोपी से पांच किलोग्राम चरस बरामद की गई थी। इसमें केवल 25 ग्राम चरस टेस्ट के लिए प्रयोगशाला भेजी गई थी। मामले पर जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत मेें अभियोग चलाया गया। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष सिर्फ 25 ग्राम चरस को साबित करने में सफल रहा है। इस जुर्म के लिए आरोपी को एक साल की सजा सुनाई जाती है। अदालत ने पाया कि आरोपी 11 फरवरी 2007 से वर्ष 2014 तक न्यायिक हिरासत में था। जितना जुर्म उसने किया है उससे ज्यादा वह सजा भुगत चुका है। अदालत ने आरोपी को 25000 रुपये के मुचलके पर रिहा कर दिया। 

विस्तार

हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद मंडी के गुड्डू राम को चरस रखने का दोषी ठहराया है। खंडपीठ ने आरोपी को एक वर्ष के कारावास की सजा सुनाई है। इससे पहले सत्र न्यायाधीश मंडी ने आरोपी को 10 वर्ष के कठोर कारावास और एक लाख रुपये जुर्माने की सजा सुनाई थी। न्यायाधीश सबीना और न्यायाधीश सुशील कुकरेजा की खंडपीठ ने यह निर्णय सुनाया। आरोपी को एक अगस्त 2008 को चरस रखने के लिए दोषी ठहराया गया था। इस निर्णय को आरोपी ने अपील के माध्यम से हाईकोर्ट के समक्ष चुनौती दी थी। हाईकोर्ट ने 26 जून 2014 को आरोपी की अपील स्वीकार करते हुए उसे बरी कर दिया था। इस फैसले को राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के समक्ष चुनौती दी। सुप्रीम कोर्ट ने 11 मार्च 2022 को सरकार की अपील को स्वीकार करते हुए हाईकोर्ट को दोबारा से मामले पर सुनवाई के आदेश दिए थे। इन आदेशों की अनुपालना में दोबारा से मामले पर सुनवाई की गई। 

अभियोजन पक्ष के अनुसार 10 फरवरी 2007 को आरोपी से पांच किलोग्राम चरस बरामद की गई थी। इसमें केवल 25 ग्राम चरस टेस्ट के लिए प्रयोगशाला भेजी गई थी। मामले पर जांच पूरी होने के बाद आरोपी के खिलाफ सत्र न्यायाधीश मंडी की अदालत मेें अभियोग चलाया गया। निचली अदालत ने आरोपी को दोषी ठहराते हुए सजा सुनाई थी। सुप्रीम कोर्ट के आदेशों के बाद हाईकोर्ट ने पाया कि अभियोजन पक्ष सिर्फ 25 ग्राम चरस को साबित करने में सफल रहा है। इस जुर्म के लिए आरोपी को एक साल की सजा सुनाई जाती है। अदालत ने पाया कि आरोपी 11 फरवरी 2007 से वर्ष 2014 तक न्यायिक हिरासत में था। जितना जुर्म उसने किया है उससे ज्यादा वह सजा भुगत चुका है। अदालत ने आरोपी को 25000 रुपये के मुचलके पर रिहा कर दिया। 



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