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सोनाक्षी।
– फोटो : संवाद
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अब बेकार बालों से भी खाद तैयार की जा सकती है। ये खाद जमीन को वे सभी पोषक तत्व देगी, जो जैविक अथवा अन्य खादों से मिलते हैं। टोकियो स्कूल की सोनाक्षी ने अपने गाइड अध्यापक एवं प्रधानाचार्य डा. संजीव अत्री के साथ ये अभिनव प्रयोग किया है। इसमें बालों का मेलानिन किया गया। इससे एक तो अपशिष्ट पानी का पीएच सामान्य हो गया, जिसका अब इस्तेमाल पौधों पर किया जा सकता है।
दूसरा, बाल कंपोस्ट खाद में बदल गए। टोकियो के प्रधानाचार्य डा. संजीव अत्री ने बताया कि 14 से 17 दिसंबर तक एनआईटी हमीरपुर में हुई राज्यस्तरीय बाल विज्ञान कांग्रेस में इस रिपोर्ट को सराहा गया। ये वैज्ञानिक परियोजना अपशिष्ट जल का मानवीय केश कतरन से शोधन पर अभिनव प्रयोग विषय पर आधारित रही। इसमें सोनाक्षी ने वरिष्ठ वर्ग में प्रदेशभर के 44 प्रतिभागियों को पछाड़ा।
इस तरह किया बालों का प्रयोग
इसे तैयार करने में सोनाक्षी ने अपनी वैज्ञानिक परियोजना में कंघी करके फेंके गए बालों और नाई की दुकानों में काटे गए बालों को इस्तेमाल किया। साथ ही गैराज में व्यर्थ पड़े तेल, ग्रीस और रसोईघर में बर्तन धोते समय निकले बारयुक्त (अपशिष्ट) पानी को भी इस्तेमाल में लाया।सबसे पहले एक बोतल में बेकार तेल और पानी को मिलाया गया। ये पानी नीचे बालों पर छोड़ा गया।
तीन से चार घंटे बालों पर पानी रहने पर पाया गया कि एक बाल का वजन पहले से आठ गुणा ज्यादा बढ़ गया। फिर बालों को एसीटोन से भिगोया, जिससे बालों का मेलानिन अलग हो गया। इसके बाद बाल घास की तरह हो गए, जिसमें नाइट्रोजन, सल्फर और नाइट्रोजन जैसे आवश्यक सभी तत्व मौजूद मिले। अब जो तरल पदार्थ (तेल) बच गया उसको किसी भी लकड़ी पर लगाने से कभी भी दीमक नहीं लगेगा। यानी लकड़ी का भी संक्रमण से बचाव होगा।
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