Sirmour News: रेणुकाजी झील का जलस्तर बढ़ा, मंदिर परिसर में तैर रहीं मछलियां

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Water level of Renukaji lake increased, fishes swimming in the temple premises

रेणुकाजी झील का जलस्तर बढ़ा
– फोटो : संवाद

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 भारी बारिश के चलते ऐतिहासिक रेणुकाजी झील के अंदरूनी जलस्रोत विकराल रूप ले रहे हैं। इससे रेणुकाजी तीर्थ में हालात खराब हो गए हैं। बुधवार सुबह प्रदेश की सबसे बड़ी प्राकृतिक रेणुकाजी झील में पानी का स्तर तीन से चार फीट तक बढ़कर साथ लगती दुकानों और आश्रमों की आखिरी पौढ़ी तक जा पहुंचा।

दुकानों में पानी भर गया है। आश्रमों के मुख्यद्वार से आवागमन पूरी तरह बंद हो गया है। संत महात्मा भी अब आश्रम से बाहर नहीं निकल पा रहे। झील के पानी का स्तर पिछले एक सप्ताह से लगातार बढ़ जा रहा है, लेकिन बुधवार को झील के पानी ने पिछले सारे रिकॉर्ड तोड़ दिए हैं। आश्रमों के ऊपर स्थित रेणुकाजी-सतौन मार्ग का पानी भी रेणुकाजी झील में ही समा रहा है।

सड़क पर जमा बरसाती पानी के झील में आने से स्थिति और विकराल हो गई है। इससे झील के स्नानघाटों के ऊपर से भी कई-कई फीट तक पानी जमा होने से दुकानों में घुस गया है। हफ्तेभर से रेणुकाजी तीर्थ की सभी दुकानें बंद करनी पड़ी हैं। तीर्थ में होने वाली चहल पहल पर विराम लग गया है।

झील में निरंतर बढ रहे पानी से रेणुकाजी तीर्थ में रहने वाले संत-महात्मा भी चिंतित हैं। उनका मानना है कि रेणुकाजी तीर्थ में ऐसी स्थिति पहले कभी देखने को मिली कि झील का पानी पैरापिटों को लांघकर आश्रमों में प्रवेश कर गया है। यहां तक की झील के ओवरफ्लो होने से मछलियां मंदिर परिसर और राम बावड़ी में तैर रही हैं।

महामंडलेश्वर स्वामी दयानंद भारती ने बताया कि उनके आश्रम की सीढि़यों तक पानी भरा हुआ है, जिससे वह आश्रम के बाहर नहीं निकल पा रहे हैं। ऐसी ही स्थिति दूसरे आश्रमों में भी बनी हुई है। उन्होंने कहा कि रेणुकाजी विकास बोर्ड को रेणुकाजी झील के पानी की निकासी का ठोस समाधान करना चाहिए।

रेणुकाजी विकास बोर्ड के कार्यकारी सीईओ और तहसीलदार ददाहू राजेंद्र ठाकुर ने बताया कि रेणुकाजी झील और परशुराम ताल की जल निकासी को पूरी तरह से साफ करवाया गया है। ताकि पानी निकलने में कोई बाधा न हो। उन्होंने कहा कि सतौन मार्ग से आ रहे पानी की रोकथाम के लिए लोक निर्माण विभाग के अधिकारियों से समाधान का आग्रह किया जाएगा।

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