Snoring: खर्राटे लेना बेहद खतरनाक, हो सकती है मौत, संगीतकार बप्पी लहरी की भी इसी वजह से गई थी जान

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सोने के समय खर्राटे

सोने के समय खर्राटे
– फोटो : अमर उजाला

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लोगों में खर्राटे की समस्या बढ़ती जा रही है। मुख्य वजह मोटापा है। खर्राटे आना अच्छी बात नहीं है। इसके बढ़ने से ब्लड प्रेशर, एसिडिटी की समस्या भी बढ़ जाती है। देहरादून से आए डॉ. हिमांशु काला ने ये बातें कहीं। वो यूपी ईएनटी एसोसिएशन व एसएन मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग की ओर से होटल क्लार्क्स शीराज में आयोजित राज्य स्तरीय सम्मेलन-यूपीएओआईकॉन के समापन अवसर पर व्याख्यान दे रहे थे।

डॉ. हिमांशु काला ने बताया कि खर्राटे जानलेवा भी हो सकते हैं। ऑक्सीजन लेवल 80 फीसदी से कम होने या फिर डेढ़ से दो मिनट तक सांस रुकने पर जान भी जा सकती है। संगीतकार बप्पी लहरी की मौत इसी बीमारी की वजह से हुई थी। खर्राटे तेज होने पर बीच-बीच में हृदय में ऑक्सीजन की आपूर्ति नहीं हो पाती है। हृदय तेजी से काम करने लगता है। ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है।

उन्होंने बताया कि ईएनटी विभाग में ही खर्राटे के विशेषज्ञ होते हैं। वजन कम करके भी खर्राटे पर 30 फीसदी तक नियंत्रण पाया जा सकता है। आखिरी दिन सैफई मेडिकल कॉलेज के डॉ. जितेंद्र चौहान ने कान की हड्डी गलने के बाद दूसरी हड्डी लगाने, दिल्ली के डॉ. सौरभ अरोड़ा ने ऑपरेशन में नसों को नुकसान से बचाने के लिए नई तकनीक पर व्याख्यान दिया।

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खून की जांच से पता चल जाता थायराइड कैंसर

एसएन मेडिकल कॉलेज के ईएनटी विभाग चिकित्सक व आयोजन के कोषाध्यक्ष डॉ. अखिल प्रताप सिंह ने बताया कि अब थायराइड कैंसर का खून की जांच से पता चल जाता है। आधुनिक मशीनें आ गई हैं। अमेरिका में जांचें की भी जा रही हैं। अभी जांच महंगी (करीब 3 लाख रुपये में) है। खून की जांच से कैंसर पता लगाने पर शोध भी चल रहा है।

एडवांस स्टेज पर पहुंचते हैं मरीज

मेदांता हॉस्पिटल लखनऊ के हेड एंड नेक कैंसर के निदेशक डॉ. विवेकानंद सिंह ने बताया कि मुंह का कैंसर तंबाकू, पान-मसाला, गुटका खाने से तेजी से बढ़ रहा है। मरीज एडवांस स्टेज पर पहुंच रहे हैं। लोग अभी भी बायोप्सी कराने से डरते हैं। जल्दी मानने के लिए तैयार नहीं होते कि उन्हें कैंसर हैं। लोगों को जागरूक होना पड़ेगा।

50 पेपर और पोस्टर प्रस्तुत किए गए

आयोजन सचिव व एसएन की ईएनटी विभागाध्यक्ष डॉ. रितु गुप्ता ने बताया कि तीन दिवसीय सम्मेलन में 50 पेपर और 55 पोस्टर पीजी के मेडिकल छात्रों ने प्रस्तुत किए। वहीं, जूनियर कंसलटेंट के 25 शोधपत्र और वीडियो प्रेजेंटेशन हुए। 450 से अधिक प्रतिनिधि शामिल हुए। 50 से अधिक आमंत्रित फैकल्टी ने व्याख्यान दिए। पांच लाइव सर्जरी की गई। प्रश्नोत्तरी प्रतियोगिता पुरस्कार वितरण भी हुए। कार्यक्रम में आयोजन अध्यक्ष डॉ. धर्मेंद्र कुमार, गौरव खंडेलवाल, डॉ. सलोनी सिंह बघेल आदि की उपस्थिति रही।

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