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कानपुर में पड़ोसी के प्लॉट से सुरंग खोदकर गुरुवार रात एसबीआई की भौंती शाखा के स्ट्रांग रूम में पहुंचकर गोल्ड वॉल्ट से 1.812 किलो सोना चोरी करने के मामले में पुलिस के हाथ इसलिए खाली हैं, क्योंकि चोर अपना होमवर्क करके आए थे, जबकि पुलिस वारदात के दिन भी फेल रही। अब जांच पड़ताल में भी ढीली है।
48 घंटे बाद भी कोई बड़ा सुराग हाथ नहीं लगा। न सीसीटीवी कैमरों से सुराग मिला। न ही सर्विलांस टीम को कुछ मिला, जिससे जांच को दिशा मिल सके। हालांकि डीसीपी पश्चिम विजय ढुल का कहना है कि जल्द ही मामले में खुलासा कर दिया जाएगा।
चोरी हुए सोने पर था, 63 लाख का लोन
बैंक मैनेजर नीरज राय ने बताया कि 29 ग्राहकों ने गोल्ड पर 63 लाख रुपये का लोन लिया था। शनिवार को बैंक बंद होने के चलते कोई ग्राहक बैंक नहीं आया था, लेकिन 15 लोगों ने कॉल कर इस संबंध में पूछताछ की थी। बैंक मैनेजर के अनुसार आठ दिसंबर को बैंक का ऑडिट था।
ऑडिटर सुरक्षा व्यवस्था को भी परखते हैं। ऐसे में ऑडिटर की रिपोर्ट पर भी सवाल खड़े हो गए हैं कि अगर बैंक की सुरक्षा व्यवस्था ठीक थी, तो स्ट्रांग रूम में रखी तिजोरी का लॉकर टूटने पर सायरन क्यों नहीं बजा। बता दें कि पिछले 15 दिनों से बैंक में ऑडिट टीम आई थी। गुरुवार को ही ऑडिट टीम लौट गई थी। उनके जाते ही वारदात को अंजाम दे दिया गया।
एक माह की फुटेज देखेंगे
बैंक में लगे 11 सीसीटीवी कैमरों के फुटेज के लिए पुलिस ने डीवीआर (डिजिटल वीडियो रिकॉर्डर) जब्त कर लिया है। वह एक माह के फुटेज खंगालने के लिए डिलीट हुई रिकार्डंग भी रिकवर कराएगी। यदि कोई संदिग्ध किसी बैंक कर्मी से अक्सर मिल रहा होगा, तो बैंककर्मी से पूछताछ होगी।
छत से लगाया स्ट्रांग रूम का पता
पुलिस का अनुमान है कि चोरों ने बैंक की छत पर पहुंचकर स्ट्रांग रूम का अनुमान लगाया होगा, क्योंकि छत पर पहुंचना आसान है। वहीं जांच में सामने आया कि बैंक के पीछे कोई मकान नहीं है। यदि चोरों ने ड्रिल मशीन चलाई होगी तो भी किसी ने नहीं सुनी होगी।
पुलिस की माने तो पीआरवी रात 11 बजे से 1 बजे तक खड़ी थी, तो उसे ड्रिल मशीन की आवाज क्यों नहीं सुनाई दी। रात के समय पुलिस का मूवमेंट बैंक के पास होता है, लेकिन बीते तीन दिनों से पुलिस का मूवमेंट बैंक के पास ज्यादा नहीं हुआ था। यदि पुलिस रोज गश्त करती, तो उसे खोदाई की भनक तक क्यों नहीं लगी।
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