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भाजपा के पूर्व महामंत्री कृपाल परमार
भाजपा के प्रदेश पदाधिकारियों और जिला अध्यक्षों की नियुक्ति के बाद भाजपा के अंदर कहीं खुशी है तो कहीं गम है। इन नियुक्तियों से कुछ भाजपाई नाखुश चल रहे हैं। कांगड़ा समेत कई क्षेत्रों के कुछ नेताओं में इससे नाखुशी है। राज्य में लोकसभा चुनाव से पहले नए प्रदेशाध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल की टीम कई असंतुष्टों के परोक्ष निशाने पर है। केंद्रीय नेतृत्व ने नगर निगम शिमला के चुनाव से पहले भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष के रूप में डॉ. राजीव बिंदल को फिर से नियुक्ति दी है और नए संगठन महामंत्री सिद्धार्थन बनाए। उसके बाद यह बात तय मानी जा रही थी कि अब डॉ. बिंदल राज्य, जिला और मंडल कार्यकारिणियों को भी अपने हिसाब से बनाएंगे। डॉ. बिंदल ने पहले जिला अध्यक्षों को बदला। इनमें शिमला संसदीय क्षेत्र में अपने पसंदीदा नेताओं को ज्यादा तरजीह दी।
मंडी में पूर्व मुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, हमीरपुर में केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर और कांगड़ा में पूर्व विधानसभा अध्यक्ष विपिन सिंह परमार के करीबियों को जिला अध्यक्ष बनाया। आने वाले लोकसभा चुनाव में भी चारों की भूमिका अपने-अपने संसदीय क्षेत्रों में महत्वपूर्ण रहने वाली है। हालांकि, प्रदेश पदाधिकारियों में भी बिंदल ने संतुलन बनाने का प्रयास करते हुए सभी खेमों के नेताओं को स्थान देने का प्रयास किया है। इसके बावजूद राज्य कार्यकारिणी में बिंदल के अपने पसंदीदा लोग ज्यादा हैं। नाराज नेताओं ने खुद को तरजीह न मिलने के चलते परोक्ष रूप या दबे स्वरों में विरोध करना शुरू कर दिया है।
भाजपा के पूर्व महामंत्री कृपाल परमार ने कहा कि भाजपा बहुत बड़ा संगठन है। इसे 40 लोगों में नहीं समेटा जा सकता है। संगठन में महिलाएं 33 प्रतिशत होनी चाहिए। बहुत से सांविधानिक प्रावधानों की अवहेलना की गई है। हालांकि, भाजपा के पूर्व विधायक रमेश धवाला कहते कि डॉ. राजीव बिंदल ने जो कार्यकारिणी बनाई होगी, वह ठीक ही बनाई होगी। उन्हें न तो इसका कोई विरोध करना है और न ही कुछ और करना है। उनका इससे कोई लेना-देना नहीं है। वह अपने काम में लगे हैं। हालांकि, भाजपा के राज्य मीडिया प्रभारी कर्ण नंदा का कहना है कि भाजपा की नई कार्यकारिणी से सभी नेता संतुष्ट हैं। कुछ लोग जो पार्टी में नहीं हैं, उनकी ओर से अगर कोई ऐसी-वैसी बात हो रही है, वह बेमतलब है।
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