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तराई पश्चिमी वन प्रभाग के फाटो जोन में सन 1912 में बने रेस्ट हाउस के पास ट्री हाउस का निर्माण किया गया था। पेड़ के ऊपर बने हाउस में होटल की तरह बेहद आकर्षक कमरे हैं। उसमें सभी सुविधाओं का ध्यान रखा गया है। ट्री हाउस में प्रकृति को नजदीक से देखने के साथ शांति की अनुभूति होती है।
ट्री हाउस को एक विशालकाय पेड़ पर बनाया गया है। इसमें लकड़ी और बांस का प्रयोग किया गया है। सैलानी सीढ़ियां चढ़कर ट्री हाउस में जाएंगे और वन विभाग की ओर से खाने-पीने की व्यवस्था की जाएगी।
तराई पश्चिमी वन प्रभाग के डीएफओ प्रकाश चंद्र आर्य ने बताया कि शासन को ट्री हाउस में रहने के रेट भेजे गए थे लेकिन अभी तक शासन से संस्तुति नहीं मिली है।
सैलानियों की ओर से ट्री हाउस में रहने इच्छा जताई जा रही है। ट्री हाउस के प्रति सैलानियों में उत्साह को देखते हुए 15 दिसंबर से शुरू किया जा रहा है।
डीएफओ ने बताया कि ट्री हाउस में रहने वाले सैलानियों के लिए सुविधाएं वन विभाग मुहैया कराएगा। फिलहाल दो हजार रुपये की दर से ट्री हाउस सैलानियों के लिए उपलब्ध कराया जा रहा है।
जैसे ही शासन से रेट तय होंगे उसे शुरू कर दिया जाएगा। खाने-पीने की सुविधा भी वन विभाग की ओर की जाएगी, जिसका भुगतान सैलानियों को करना होगा।
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