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यूपी पुलिस की गाड़ी
– फोटो : अमर उजाला
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मानवाधिकार आयोग के बाद अब हाईकोर्ट ने भी फर्जी ऑनर किलिंग में फंसाकर जेल भेजे गए पिता-पुत्र व अन्य लोगों को मुआवजा देने के निर्देश दिए हैं। जिंदा किशोरी की हत्या के आरोप में जेल काटने वाले पिता, भाई और रिश्तेदार को पहले भी एक लाख रुपये का मुआवजा मिल चुका है।
जिसमें दो लोग वह भी शामिल हैं, जो किशोरी के अपहरण के आरोप में जेल गए थे। इन सभी लोगों को मानवाधिकार आयोग के निर्देश पर करीब नौ महीने पहले शासन ने एक-एक लाख रुपये का मुआवजा दिया जा चुका है।यह पूरा प्रकरण आदमपुर थानाक्षेत्र के एक गांव का है।
यहां रहने वाले किसान की 15 वर्षीय बेटी छह फरवरी 2019 को खेत से अचानक गायब हो गई थी। 10 फरवरी 2019 को किशोरी के भाई ने पांच लोगों के खिलाफ अपहरण की एफआईआर दर्ज कराई थी। पुलिस ने इस मामले में नामजद दो आरोपियों को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।
बावजूद इसके किशोरी की बरामदगी नहीं हो सकी थी। मुकदमे की विवेचना तत्कालीन इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा कर रहे थे। उन्होंने जेल भेजे गए दोनों नामजद आरोपियों को निर्दोष बताते हुए रिहा करा दिया था। लेकिन, बाद में षड्यंत्रकारी पुलिस ने बड़ा कारनामा कर डाला था।
28 दिसंबर 2019 को किशोरी के पिता, भाई और एक रिश्तेदार को किशोरी का हत्यारा बताकर जेल भेज दिया था। तर्क दिया था कि किशोरी के गलत संगत में पड़ने पर परिवार ने इज्जत बचाने के लिए उसकी गोली मारकर हत्या कर दी और बाद में शव गंगा में बहा दिया।
सात अगस्त 2020 को किशोरी के जिंदा होने की जानकारी सामने आ गई। किशोरी अपने गांव से आठ किलोमीटर दूर प्रेमी के गांव में सुरक्षित मिली। खुलासा हुआ कि प्रेमी के साथ शादी करके वह पत्नी के रूप में रह रही थी।
इसका पता चलते ही पुलिस ने यू-टर्न लेकर प्रेमी से किशोरी के पति बने युवक को अपहरण और नाबालिग से दुष्कर्म के आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था। दूसरी ओर यह सच अदालत तक पहुंचा तो किशोरी के पिता, भाई और रिश्तेदार को जेल से रिहाई मिली थी।
अदालत की कड़ी टिप्पणी के बाद विवेचना से लेकर खुलासे तक में शामिल रहे इंस्पेक्टर अशोक कुमार शर्मा समेत ग्यारह पुलिस कर्मियों के खिलाफ के मुकदमा दर्ज हुआ था। इस मुकदमे की विवेचना संभल क्राइम ब्रांच कर रही है।
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