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– फोटो : अमर उजाला
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अयोध्या में विवादित ढांचा गिराए जाने के बाद छह दिसंबर 1993 को कानपुर व लखनऊ समेत चार महानगरों में ट्रेनों में हुए सिलसिलेवार बम धमाकों के मामले में राजस्थान के अजमेर स्थित टाडा मामलों के विशेष न्यायालय में चल रही सुनवाई पूरी हो गई है। इस मामले में 30 साल बाद कोर्ट ने फैसला सुनाते हुए करीम टुंडा को बरी कर दिया है।
वहीं, इरफान और हमीमुद्दीन को दोषी माना है। अब्दुल करीम टुंडा के एडवोकेट शफकत सुल्तानी ने बताया कि सीबीआई कोर्ट द्वारा लगाए गए आरोप कोर्ट ने नहीं माने और करीब को बरी कर दिया। वहीं, अन्य दो आरोपी इरफान और हमीमुद्दीन को न्यायालय ने दोषी माना है, उन्हें उम्र कैद की सजा सुनाई है।
बता दें कि मामले में हापुड़ जिले के कस्बा पिलखुवा का रहने वाले अब्दुल करीम उर्फ टुंडा के अलावा इरफान और हमीमुद्दीन को आरोपी बनाया गया है। बम धमकों के बाद टुंडा फरार हो गया था और 2013 में नेपाल सीमा से पकड़ा गया था। जांच में दावा किया गया था कि टुंडा आतंकी संगठन लश्कर-ए-तैयबा का विस्फोटक विशेषज्ञ था।
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