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रागी के लड्डू के स्टॉल के साथ रवि
– फोटो : अमर उजाला
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बचपन में मां जब रागी के आटे का हलवा बनाती थी, तो पूरे घर में उसकी खुशबू फैल जाती थी। हलवा, लड्डू हो या रोटी मां के हाथों बना रागी का हर स्वाद आज भी लोगों की जुबान पर है। उसी पारंपरिक स्वाद को शामली के जलालपुर के रवि कुमार लोगों तक पहुंचा रहे हैं। उनके द्वारा बनाए गए स्वाद और इम्यूनिटी से भरपूर रागी के लड्डू, केक, नमकीन, बिस्किट आदि का सेवन कर लोग अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ा रहे हैं। उन्होंने 30 अन्य महिलाओं को भी रोजगार दिया हुआ है।
जलालपुर के रहने वाले रवि कुमार ने बताया कि स्नातक हैं। दिल्ली में इनकम टैक्स विभाग में संविदा पर नौकरी करते थे। मगर कोरोना काल से पूर्व ही नौकरी को छोड़कर गांव में ही पिग फार्म खोल लिया था। कोरोना काल में फार्म को बंद करना पड़ा। जिस पर मैंने कृषि विभाग की मदद से भूमित्र जलालपुर फाॅर्मर प्रोड्यूसर कंपनी की स्थापना की।
पिछले करीब छह माह से रागी की नमकीन, बिस्किट, लड्डू, आटा, केक आदि तैयार कर शामली, बागपत, मुजफ्फरनगर, सहारनपुर, बिजनौर आदि जिलों में बेचे जा रहे हैं। दो से तीन माह में 6 से लेकर 7 लाख रुपये तक कमा रहे हैं।
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