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कन्नौज स्टेशन की प्रतिकात्मक फोटो
– फोटो : अमर उजाला
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अब से ठीक चार दशक पहले 1984 में अपने गठन के बाद से ही बसपा का कन्नौज में एक बार भी खाता नहीं खुल सका है। इन चार दशक के दौरान हुए 12 चुनाव के दौरान बसपा दूसरे और तीसरे नंबर तक पहुंची, लेकिन अव्वल मुकाम हासिल नहीं कर सकी। यहां के लोगों के बीच अपनी पैठ बनाने के लिए प्रदेश में बसपा शासन के दौरान कन्नौज को 1997 में जिला बनाकर नई पहचान भी दी गई। इसके बावजूद सियासी कामयाबी नहीं हो सका।
वर्ष 1967 में गठिक कन्नौज संसदीय सीट पर बारी-बारी से सभी प्रमुख पार्टियों को कामयाबी मिलती रही है। शुरू के दौरान में गैर भाजपा और गैर कांग्रेस के उम्मीदवार कामयाब होते रहे। 90 के दशक में यहां सपा का दबदबा हो गया। समाजवादी पार्टी ने लगातार सात चुनाव में कामयाबी हासिल की। अपने सुनहरे दौर में कांग्रेस भी यहां से दो बार कामयाबी का मजा चख चुकी है। भाजपा को भी पिछले चुनाव में मोदी लहर के दौरान और उससे पहले वर्ष 1996 में यहां जीत हासिल हुई है। इन सबके बीच सूबे की सियासत में खास दबदबा रखने के बावजूद बसपा को यहां कभी भी लोकसभा चुनाव में कामयाबी नहीं हासिल हुई। यहां से एक अदद जीत के लिए पार्टी की ओर से कई प्रयोग किए गए। स्थानीय से लेकर बाहर के चेहरों को मौका दिया गया। सवर्ण, पिछड़ा और मुस्लिम चेहरों को भी बारी-बारी से मौका दिया, लेकिन नतीजा नहीं हासिल हुआ है।
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