UP: बीमा पालिसी की शर्तें हिंदी में भी दें और बड़े अक्षर में लिखें, उपभोक्ता आयोग ने दिया आदेश

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Consumer forum says insurance policy's conditions should be in capital letter and in Hindi.

प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : Istock

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राज्य उपभोक्ता आयोग ने इंसाफ के लिए 14 साल से भटक रहे एक पीड़ित पिता के मामले में जीवन बीमा कंपनी को 3.20 लाख रुपये हर्जाना भरने का आदेश दिया। आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने कहा कि बीमा एजेंट पॉलिसी बेचने और कमीशन के लालच में शर्तों को छुपा जाते हैं। उन्होंने बीमा कंपनी को शर्तें हिंदी में भी देने और बड़े अक्षरों में लिखने का आदेश भी दिया।

आगरा निवासी मानसिंह ने वर्ष 2009 में अपने 13 साल के बेटे अजय कुमार के नाम से एलआईसी की एक पॉलिसी ली थी। प्रीमियम की दो किस्तें जमा कर दी थी। तभी 13 मई 2010 को करंट लगने से अजय की मौत हो गई। एलआईसी ने यह कहते हुए क्लेम देने से इन्कार कर दिया कि बीमा पॉलिसी में बेटे की उम्र 12 साल थी, जबकि 14 साल बताया गया है।

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आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति अशोक कुमार ने मामले में सुनवाई के बाद आदेश दिया कि पीड़ित को 3.20 लाख रुपये सात फीसदी ब्याज के एलआईसी को देना होगा। उन्होंने कहा कि बीमा एजेंट अपना लाभ देख ग्राहकों को गुमराह करते हैं और पॉलिसी थमा देते हैं।

बीमा कंपनी की पॉलिसी भी बेहद छोटे अक्षरों और अंग्रेजी में होती है। 98 फीसदी लोग इसे नहीं पढ़ सकते हैं, इसलिए एजेंट की बातों पर भरोसा करके पॉलिसी ले लेते हैं। न्यायमूर्ति ने कहा कि जरूरत पड़ने पर बीमा कंपनियां क्लेम देने से बचने के रास्ते ढूंढती हैं। उन्होंने यह भी आदेश दिया कि बीमा दस्तावेज हिंदी में भी दिए जाएं और अक्षर बड़ा हो ताकि अदालतों पर अनावश्यक बोझ न बढ़े।

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