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UP Nikay Chunav
– फोटो : अमर उजाला
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निकाय चुनाव में भाजपा की प्रचंड जीत के पीछे माफिया राज के खात्मे का मुद्दा सबसे अहम माना जा रहा है। अतीक अहमद के गठजोड़ और आर्थिक साम्राज्य को ध्वस्त करने के साथ ही अपराधियों के हौसले पस्त करने के लिए बुलडोजर बाबा की लोकप्रियता का फायदा अब आगामी लोकसभा चुनाव में मिलने की उम्मीद है।
कहा जा रहा है कि बुलडोजर के जरिए सुशासन और कानून व्यवस्था की स्थापना का मुद्दा 2024 के लिए बड़ा मास्टर स्ट्रोक साबित हो सकता है। निकाय चुनाव के एलान से पहले बसपा विधायक राजू पाल हत्याकांड के मुख्य गवाह उमेश पाल की हत्या के बाद संगमनगरी में कानून व्यवस्था का मुद्दा गरमा गया।
विधानसभा में सीएम योगी के माफिया को मिट्टी में मिलाने के संकल्प के बाद कानून व्यवस्था को लेकर न सिर्फ सियासी पारा चढ़ा, बल्कि सूबे में बिकरू कांड के बाद 2020 में शुरू हुई बुलडोजर कार्रवाई भी सतह पर आ गई।
इसी क्रम में उमेश के फरार हत्यारों और उनसे जुड़े अपराधियों के घरों पर बुलडोजर चलवाकर सरकार ने न सिर्फ माफिया-अपराधी गठजोड़ को पस्त किया, बल्कि आम जन के बीच सुशासन की स्थापना का भरोसा भी पैदा किया। आमतौर पर तोड़फोड़ के उपकरण के रूप में देखा जाने वाला बुलडोजर न सिर्फ यूपी में, बल्कि दूसरे राज्यों में भी सुशासन का प्रतीक बन गया है।
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