UP: यूपी सरकार के साथ उद्योगपतियों ने किया संवाद, बोले- एनओसी के लिए बने फास्ट ट्रैक सिस्टम

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Industrialists and ministers talk over business friendly atmosphere in Uttar Pradesh.

संवाद में मौजूद वित्त मंत्री सुरेश खन्ना व औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी व अन्य।
– फोटो : amar ujala

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उत्तर प्रदेश में औद्योगिक निवेश को और अधिक प्रोत्साहित करने के लिए लखनऊ में सरकार और उद्योगपतियों के बीच जीवंत संवाद हुआ। इसमें उद्योगपतियों ने सरकार की नीतियों को सराहने के साथ ही विभिन्न एनओसी को लेकर आ रहीं दिक्कतों को भी सामने रखा। उद्योगों को एनओसी के लिए फास्ट ट्रैक सिस्टम विकसित करने पर भी जोर दिया। वित्त मंत्री सुरेश खन्ना और औद्योगिक विकास मंत्री नंद गोपाल गुप्ता नंदी ने उद्योपतियों को सुना और उन्हें यूपी की अनुकूल परिस्थितियों के साथ ही यहां निवेश की अपार संभावनाएं भी बताईं।

शुद्ध प्लस हाईजीन प्रोडक्ट्स के अमर तुलसियान ने कहा कि मौजूदा सरकार के कार्यकाल में उद्योगों को नीति के तहत सब्सिडी मिल रही है लेकिन नौकरशाही को क्लियरेंस की रफ्तार तेज करने की आवश्यकता है। इसके लिए फास्ट ट्रैक सिस्टम विकसित किया जाना चाहिए। टैक्स टेरेरिज्म (कर वसूली के नाम पर होने वाली दिक्कतों) से बचाव के लिए समुचित कदम उठाने पर भी जोर दिया। कहा कि ऐसा नियम बने कि उद्योग से जुड़े मामलों में उद्योगपतियों की गिरफ्तारी हाईकोर्ट के आदेश के बिना न हो। ईपीएफ सब्सिडी से जुड़े मामले भी उठाए गए।

रिमझिम इस्पात के चेयरमैन योगेश अग्रवाल ने निर्यात में भाड़े की सब्सिडी का मुद्दा उठाया। स्टीलर कंपनी के अक्षय सेठी ने कहा कि कारोबारी सुगमता बढ़ी है, पर पर्यावरण संबंधी मानक तेजी से बदलते हैं, जिसकी जानकारी न होने से दिक्कत होती हैं। केंट आरओ सिस्टम के चेयरमैन महेश गुप्ता ने कहा कि यूपी सरकार के सुशासन ने प्रदेश में निवेश के लिए अनुकूल माहौल तैयार किया है। लोहिया ग्लोबल के अध्यक्ष विनीत लोहिया ने कहा कि यूपी निवेशकों के लिए बेहतरीन सब्सिडी व प्रोत्साहन लेकर आया है। हिकमा एनर्जी प्रा. लि. के अध्यक्ष तारिक नकवी व श्री सीमेंट के उपाध्यक्ष प्रशांत बांगुर आदि ने भी विचार रखे।

यूपी की जीडीपी में औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा बढ़ाने का अवसर : खन्ना

वित्त मंत्री सुरेश खन्ना ने उद्यमियों से कहा कि प्रदेश में जो पैदा होता है उसे कच्चे माल के तौर पर इस्तेमाल करें। वर्ष 2017 में बिजली की मांग 13000 से 14000 मेगावाट की मांग थी, जो आज 30,000 मेगावाट के ऊपर हो गई है। राज्य की जीडीपी में कृषि का हिस्सा 25-26 प्रतिशत है और अब जीडीपी में औद्योगिक क्षेत्र का हिस्सा बढ़ाने का अवसर है।

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