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सपा प्रमुख अखिलेश यादव, रवि प्रकाश वर्मा
– फोटो : अमर उजाला
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करीब दो दशक तक समाजवादी सिपाही रहे पूर्व सांसद रवि प्रकाश वर्मा ने सपा का साथ छोड़ दिया। शुक्रवार को 20 साल की समाजवादी सियासत के सफर को विराम देते हुए जब उन्होंने पार्टी की प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दिया तो उनका गला भर आया। रवि वर्मा बोले, अब अखिलेश मेरी नहीं सुन रहे थे। इसलिए वह अब प्राथमिक सदस्यता से इस्तीफा दे रहे हैं। राष्ट्रीय महासचिव के पद से उन्होंने पांच महीना पहले इस्तीफा तभी दे दिया था, जब वह यादव बिरादरी के नए नेताओं की गुटबाजी से आहत थे। फिलहाल, कुछ ही दिन में कांग्रेस उनका नया ठिकाना होगी। उधर, पार्टी सूत्रों के मुताबिक सपा के सभी नेताओं को लखनऊ तलब किया गया है।
दो दशक से भी ज्यादा समय तक सपा में तीन बार लोकसभा और एक बार राज्यसभा के सदस्य रहे रवि प्रकाश वर्मा के खिलाफ माहौल इसी साल उस समय बनने लगा था, जब उन्हें जनवरी 2023 में तीसरी बार पार्टी का राष्ट्रीय महासचिव बनाया गया था। इसके बाद से ही यादव बिरादरी के पूर्व जिलाध्यक्ष के नेतृत्व में रवि वर्मा का विरोध शुरू हो गया था।
अखिलेश के सामने भिड़े थे नेता
पांच महीने पहले जब लखनऊ में सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने लखनऊ में कुर्मी नेताओं को बुलाया था। तब अखिलेश ने 2024 का चुनाव लड़ाने की बात पूछी तो रवि वर्मा के साथ अन्य सजातीय नेता का नाम आया। इस पर पूर्व सदर विधायक की शिकायत हुई। वहां पर रवि वर्मा और दूसरे सजातीय नेता पूर्व सदर विधायक के गुट की अखिलेश के सामने भिड़ंत हो गई।
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