UP News: न्याय में देरी, न्याय न मिलने के समान…वाराणसी में परिवार न्यायालय के न्यायाधीशों का प्रशिक्षण शुरू

[ad_1]

Delay in justice is equal to denial of justice Training of family court judges begins in Varanasi

वाराणसी सहित 12 जिलों के परिवार न्यायालय के न्यायाधीशों का दो दिवसीय प्रशिक्षण
– फोटो : अमर उजाला

विस्तार


न्यायमूर्ति अरुण कुमार सिंह देशवाल ने कहा कि न्याय में देरी, न्याय न मिलने के समान है। समय पर न्याय प्राप्त करने में कठिनाई के कारण वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रियाएं जैसे बातचीत, मध्यस्थता, पंच निर्णय और सुलह को बढ़ावा मिला है। यह मंच पक्षकारों को मुकदमेबाजी का सहारा लिए बिना समाधान खोजने का अवसर प्रदान करते हैं। वह सर्किट हाउस सभागार में वाराणसी सहित 12 जिलों के परिवार न्यायालय के न्यायाधीशों के दो दिवसीय प्रशिक्षण शिविर में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि कई तलाकशुदा जोड़े पाते हैं कि मध्यस्थता उन्हें तलाक के मुकदमेबाजी की उच्च वित्तीय और भावनात्मक लागतों से बचने की अनुमति देती है। उन्हें शाब्दिक रूप से अदालत कक्ष के बाहर रखते हैं।

न्यायमूर्ति विनोद दिवाकर ने प्रशिक्षण की आवश्यकता पर जोर दिया और कहा कि पारिवारिक विवादों का व्यक्तियों और उनके प्रियजनों के जीवन पर गहरा प्रभाव पड़ता है। वे परिवारों के सामंजस्य और स्थिरता को चुनौती देते हुए हमारे समाज के मूल को छूते हैं। न्यायाधीशों के रूप में हमारा कर्तव्य है कि हम एक ऐसा मंच प्रदान करें, जहां परिवारों को सांत्वना, समझ और समाधान मिल सके।

ये भी पढ़ें: मुख्तार पर गैंगस्टर मामले में बहस के लिए कोर्ट ने दी 27 जुलाई की तारीख, जानें क्या है मामला

पारंपरिक प्रतिकूल अदालती कार्रवाई हालांकि कुछ मामलों में आवश्यक है, लेकिन हमेशा सौहार्दपूर्ण समाधान को बढ़ावा देने और पारिवारिक रिश्तों को संरक्षित करने के लिए अनुकूल नहीं होती है। न्यायमूर्ति अजय भनोट ने सभी प्रतिभागियों को उपयोगी प्रशिक्षण सत्र के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि इस प्रशिक्षण के बाद फैमिली कोर्ट के न्यायाधीश बेहतर इंसान और बेहतर न्यायाधीश बनकर सामने आएंगे।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *