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प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : istock
विस्तार
संभावित आपदाओं से घिरे उत्तराखंड राज्य के लिए सेल ब्रॉडकास्ट तकनीक कारगर सिद्ध हो सकती है। इसके माध्यम से बादल फटने, बिजली गिरने, हिमस्खलन, भूस्खलन जैसी आपदाओं के बाद होने वाले वाले नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकता है। यह तकनीक आपदा की स्थिति में मोबाइल फोन के जरिए लोगों को अलर्ट कर देती है।
ऐसी स्थिति में संभावित आपदा क्षेत्र में जितने भी मोबाइल मौजूद होंगे, वह स्वत: बजने लगेंगे, भले ही उस इलाके का नेटवर्क ठप्प हो गया हो। उत्तराखंड राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (यूएसडीएमए) की ओर से आयोजित कार्यशाला में ऊटीमाको कंपनी के सीईओ रोनेन डैनियल ने सेल ब्रॉडकास्ट पर अपना प्रस्तीतुकरण दिया। उन्होंने बताया कि आपदा के समय में यह तकनीक न्यूनतम समय में लोगों को अलर्ट कर देती है।
मौसम संबंधी पूर्व चेतावनी भी जारी
यह प्रणाली सीएमएएस अलर्ट का प्रसार करने में सक्षम है, जो चेतावनी जारी करने का विश्व में सबसे बेहतर मानक है। सीएमएएस अलर्ट से पहले मोबाइल पर जोर से बीपिंग ध्वनि अलार्म टोन, फोन का लगातार कंपन होता है और पॉप-अप मैसेज आता है, जो तब तक बंद नहीं होता, जब तक कि संबंधित व्यक्ति उसे स्वयं बंद नहीं करता। इसकी क्षमता कुछ ही मिनट के भीतर लाखों लोगों को सचेत करने की है। उन्होंने बताया कि इस तकनीक के माध्यम से मौसम संबंधी पूर्व चेतावनी भी जारी की जाती है।
जापान, कनाडा, संयुक्त अरब अमीरात, इजराइल, कोरिया, नीदरलैंड, यूरोपीय संघ जैसे दुनिया के तमाम देश आज इस तकनीक को अपना रहे हैं। भारत में आंध्र प्रदेश राज्य ने इस तकनीक को अपनाया है, जहां सुनामी और साइकलॉन आने का खतरा बना रहता है।
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