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सांकेतिक तस्वीर
– फोटो : संवाद
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बिजली, पानी, खनन और वानिकी से जुड़े विभागों से प्रदेश सरकार की उम्मीदों को झटका लगा है। वित्तीय वर्ष के नौ महीने पूरे होने जा रहे हैं, लेकिन आय की संभावनाओं वाले चार प्रमुख क्षेत्रों का प्रदर्शन उत्साहित करने वाला नहीं है। यही वजह है कि मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी व वित्त मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल कम कमाई करने वाले विभागों पर विशेष प्रयास किए जाने के लिए लगातार दबाव बना रहे हैं।
कुछ दिन पूर्व हुई समीक्षा के दौरान आय से संबंधित आंकड़े प्रस्तुत किए गए। सरकार ने स्वयं के प्रयासों से इस साल 24745 करोड़ रुपये की आय का लक्ष्य रखा है। लेकिन इसके सापेक्ष उसे 22 दिसंबर तक 16436 करोड़ रुपये की आय हुई है। इस आय में स्टाम्प, परिवहन, वैट, एसडीएसटी व आबकारी से होने वाली आय का बड़ा योगदान है। आबकारी में विभाग ने दिसंबर तक लक्ष्य के सापेक्ष प्रतिशत यानी 3008 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त कर लिया है।
लेकिन जल कर, विद्युत कर, खनन और वानिकी सरीखे सेक्टर से आय उम्मीद के अनुरूप नहीं हो पाई है। इतना जरूर है कि पिछले वित्तीय वर्षों की तुलना में सुधार है, लेकिन तय लक्ष्य से अभी काफी पीछे हैं। मिसाल के तौर पर सरकार ने जल कर से 500 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त होने का लक्ष्य बनाया है, लेकिन अभी तक 176 करोड़ की खजाने में आ पाएं हैं। वर्ष 2022-23 में 123 करोड़ की आय अर्जित की थी। विद्युत कर के लिए सरकार ने 550 करोड़ राजस्व प्राप्त करने का लक्ष्य रखा था, जिसके सापेक्ष 170 करोड़ ही खजाने में आ पाए हैं। पिछले साल इस मद में 72 करोड़ की आय हुई थी। खनन मद में 875 करोड़ के सापेक्ष सरकार के खाते में 355 करोड़ ही आ पाए, जबकि पिछले वर्ष पूरे वित्तीय वर्ष में विभाग ने 475 करोड़ रुपये कमाए थे।
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