Uttarakhand: यूपीसीएल के चार हजार करोड़ बकाया पर दोबारा आएगा प्रस्ताव, मामले को कैबिनेट में लाने की तैयारी

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Uttarakhand News Proposal will come again on UPCL four thousand crore dues

बकाया
– फोटो : Istock

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उत्तराखंड पावर कारपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) का उत्तराखंड से परिसंपत्तियों के बंटवारे के समय हिस्से में आई देन दारियों का 4042 करोड़ बकाया का प्रस्ताव अब दोबारा जाएगा। पहले प्रस्ताव पर वित्त ने इंकार कर दिया था। मामले को कैबिनेट में लाने की तैयारी है।

दरअसल, राज्य गठन के बाद यूपी से परिसंपत्तियों का बंटवारे को लेकर 2003 में दोनों राज्यों के बीच समझौता हुआ था। इसके तहत यूपीसीएल को परिसंपत्तियों के साथ ही देनदारियां भी मिली थीं। परिसंपत्तियों के रूप में 508 करोड़ रुपये शासन को देने थे, जो बाद में दोबारा आंकलन होने पर 1058 करोड़ रुपये तय हुए।

हर साल ये देनदारी यूपीसीएल पर आती

2012 में ट्रांसफर स्कीम के तहत बाकायदा 1058 करोड़ का शासनादेश भी हो गया था। इसकी अधिसूचना न होने की वजह से नियामक आयोग ने यूपीसीएल को इसकी वसूली उपभोक्ताओं से नहीं करने दी। 2022 में इसकी अधिसूचना जारी हुई। इस बीच यह रकम बढ़कर 4042 करोड़ पर पहुंच गई। ऊर्जा विभाग ने इस रकम को इलेक्ट्रिसिटी ड्यूटी, ग्रीन सेस, निशुल्क बिजली, जल कर आदि में एडजस्ट करने का प्रस्ताव शासन को भेजा था। क्योंकि हर साल ये देनदारी यूपीसीएल पर आती है।

यह प्रस्ताव कैबिनेट में गया था लेकिन वित्त विभाग ने इस पर आपत्ति लगा दी थी, जिसके चलते अटक गया था। सचिव ऊर्जा आर मीनाक्षी सुंदरम ने बताया कि अब इसका प्रस्ताव दोबारा तैयार किया जा रहा है। फिर प्रस्ताव कैबिनेट में लाया जाएगा। माना जा रहा है कि अगर इस रकम पर सरकार कोई राहत नहीं देती तो उपभोक्ताओं की जेब पर इसका बोझ पड़ना लाजिमी है।

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सरकार ने राहत न दी तो ये होगा असर

अभी यूपीसीएल ने नियामक आयोग में दो तरह का प्रस्ताव दिया है। पहला प्रस्ताव ये है कि अगर सरकार इस रकम को एडजस्ट कर देती है तो 23 प्रतिशत तक विद्युत दरों में बढ़ोतरी की जाए। दूसरा प्रस्ताव ये है कि अगर एडजस्ट नहीं होती तो 27.06 प्रतिशत की बढ़ोतरी की जाए।

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