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प्रतीकात्मक तस्वीर
– फोटो : संवाद
विस्तार
प्रदेश के विभिन्न वन प्रभागों में वन्यजीवों की गणना, मूवमेंट पर नजर रखने और सुरक्षा के लिहाज से लगाए गए कैमरा ट्रैप चोरी होने की सूचना से वन विभाग में हड़कंप मचा हुआ है। वन विभाग कैमरों के चोरी होने और उन्हें नुकसान पहुंचाए जाने की बात तो स्वीकार कर रहा है, लेकिन कितने कैमरे चोरी हुए हैं, इसका आंकड़ा विभाग के पास भी नहीं है।
वन्य जीवों के संरक्षण के लिए उत्तराखंड में छह राष्ट्रीय उद्यान, सात वन्य जीव विहार, चार संरक्षण वन क्षेत्र और एक उच्च स्थलीय प्राणी उद्यान व एक जैव सुरक्षित क्षेत्र है। यहां हाथी, बाघ, भालू, हिम तेंदुए, भूरा भालू, कस्तूरी मृग, भरल, थार, काला भालू, हिमालयन भालू, मस्क डियर, मोनाल, कस्तूरी मृग जैसे जीवों की सुरक्षा और गणना के लिए समय-समय पर विभिन्न चिह्नित स्थानों पर गुप्त रूप से कैमरा ट्रैप लगाए जाते हैं, जिससे इनके आसपास होने वाली किसी भी हलचल को कैद किया जा सके।
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक ने स्वीकारी बात
कई बार जब शिकारी या कुछ अवांछित तत्व इन कैमरों के सामने से गुजरते हैं तो इनकी फोटो क्लिक (ट्रिप-ट्रिप) की आवाज उन्हें सचेत कर देती है। ऐसे में शिकारी को लगता है कि उसकी तस्वीर भी कैमरा ट्रैप में कैद हो गई है। खुद को बचाने के लिए शिकारी कैमरा अपने साथ ले जाता है या उसे तोड़ देता है।
मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ. समीर सिन्हा ने इस बात को स्वीकार किया है। उन्होंने कहा कि पिछले कुछ माह में विभिन्न प्रभागों से कैमरा ट्रैप चोरी होने या उन्हें नुकसान पहुंचाए जाने की सूचना मिली है, लेकिन कितने कैमरा ट्रैप चोरी हुए इसकी अभी जानकारी जुटाई जा रही है।
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