Uttarakhand: हिमालय पुत्र हेमवती नंदन बहुगुणा के सपने को सहेज नहीं पाया प्रदेश, अनदेखी का शिकार हुई योजनाएं

[ad_1]

Uttarakhand could not save the dream of Himalayas son Hemwati Nandan Bahuguna

हेमवती नंदन बहुगुणा
– फोटो : amar ujala

विस्तार

दूध उत्पादन से किसानों की आय बढ़ाने के दावों के बीच 44 साल पहले खुला विदेशी पशु प्रजनन केंद्र की पास 398 एकड़ भूमि खड़ी झाड़ियां हकीकत बयां कर रही हैं। भराड़ीसैंण में इस केंद्र को खोलने के लिए तब दो करोड़ रुपये खर्च हुए थे लेकिन किसानों को लाभ धेले का नहीं हुआ।

यह केंद्र उत्तर प्रदेश के तत्कालीन मुख्यमंत्री और हिमालय पुत्र हेमवती नंदन बहुगुणा का सपना था। किसानों को उन्नत नस्ल के मवेशी उपलब्ध कराने के लिए 15 नवंबर 1979 में इस केंद्र की स्थापना हुई थी। तब यह एशिया का सबसे बड़ा पशु प्रजनन केंद्र था। केंद्र के लिए सरकार ने डेनमार्क से लाखों रुपये खर्च कर जर्सी सांड़ और गाय मंगवाई थीं। वर्ष 1995 तक इस केंद्र ने बेहतर काम किया और उन्नत किस्म के कुछ सांड़ 15-15 हजार रुपये में बेचे गए।

खाली पड़ी जमीन पर झाड़ियां उगी हुई

केंद्र में आठ साल पहले तक 190 पशु थे। इनमें 33 गाय, 65 बछिया, 57 सांड व अन्य पशु थे। उसके बाद यह केंद्र सरकारी सिस्टम की लापरवाही का शिकार हो गया। सरकार से बजट नहीं मिलने के कारण यह केंद्र बदहाल हो गया है। पशु केंद्र की कुछ नाली भूमि पर कार्यालय, कर्मचारियों के निवास और गोशाला है।

बाकी खाली पड़ी जमीन पर झाड़ियां उगी हुई हैं। अब यहां एक भी मवेशी नहीं है। परवाड़ी के पूर्व ग्राम प्रधान जोगेंद्र सिंह ने कहा कि वर्तमान में यहां पर एक भी गाय और सांड नहीं रह गया है। सिर्फ दो कर्मचारी केंद्र की देखभाल कर रहे हैं।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *