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मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी
– फोटो : amar ujala
विस्तार
प्रदेश में वन संपदा को लोगों की आजीविका से जोड़ते हुए कई नए प्रयोग करने की तैयारी है। इसके तहत उच्च हिमालयी क्षेत्रों सहित मैदानी इलाकों के लिए अलग-अलग योजनाओं पर काम किया जा रहा है।
इसके तहत अखरोट, बांस बांज, सागोन, पापुलर जैसी प्रजातियों को बढ़ावा दिया जाएगा। उच्च हिमालय क्षेत्रों में उद्यान विभाग के साथ मिलकर अखरोट उत्पादन को बढ़ावा देने के लिए वेलनट मिशन के तहत काम किया जाएगा। एक अनुमान के अनुसार, राज्य की आय में वानिकी क्षेत्र की हिस्सेदारी 2.5 से 3.5 प्रतिशत तक है, जबकि वानिकी क्षेत्र को राज्य की आर्थिकी का प्रमुख ग्रोथ ड्राइवर चिह्नित किया गया है।
इसलिए धामी सरकार को इस बात पर जोर है कि कैसे वानिकी क्षेत्र का उपयोग करते हुए इसे वन पंचायतों और लोगों की आजीविका से जोड़ा जाए। इस संबंध में बीते दिनों मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने वन अधिकारियों की बैठक लेकर लंबी चर्चा की थी। इसी बैठक में वानिकी क्षेत्र के राजस्व प्रतिशत को बढ़ाने पर कई मुद्दों पर चर्चा की गई।
इसके साथ ही लीसा बिक्री के नियमों में भी बदलाव की तैयारी है। प्रदेश में लीसा बिक्री की ऑनलाइन व्यवस्था के तहत नीलामी की जाती है, स्थानीय लोगों को इसका कोई लाभ नहीं मिल पता है। इसके ध्यान में रखते हुए मुख्यमंत्री के स्तर से स्थानीय स्तर पर लीस ब्रिकी संभावनाओं को तलाशने के निर्देश दिए गए हैं।
काटे जाएंगे यूकेलिप्टस के पुराने पेड़
प्रदेश में यूकेलिप्टस प्रजाति के पुराने पेड़ों को काटने के लिए कार्ययोजना में शामिल करने के निर्देश शासन स्तर पर दिए गए हैं। इनके स्थान पर जरूरत के अनुसार नई प्रजाति के पौधे भी लगाए जा सकते हैं, जो नॉन टिबंर फॉरेस्ट प्रोडेक्ट की श्रेणी में आते हों।
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