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मीटिंग ( प्रतीकात्मक)
– फोटो : अमर उजाला
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राजाजी टाइगर रिजर्व के दस किमी के दायरे में पड़ने वालीं नदियों में फिलहाल खनन नहीं हो पाएगा। नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक में इस मुद्दे पर सहमति नहीं बनने पर इसे अगली बैठक तक के लिए टाल दिया गया है। एक दिन पहले मंगलवार को नई दिल्ली में नेशनल वाइल्ड लाइफ बोर्ड की बैठक आयोजित हुई थी। जिसमें उत्तराखंड से संबंधित मुद्दे भी उठे।
इनमें राजाजी टाइगर रिजर्व की 10 किमी परिधि में खनन संबंधी मामले में चर्चा हुई। इस मामले में भारतीय वन्यजीव संस्थान (डब्लूआईआई) के विशेषज्ञों की रिपोर्ट पूर्व में प्रस्तुत की जा चुकी थी। इस रिपोर्ट के बाद उत्तराखंड के चीफ वाइल्ड लाइफ वार्डन डॉ.समीर सिन्हा को इस मामले का परीक्षण करने के साथ ही स्थलीय निरीक्षण कर रिपोर्ट बोर्ड को सौंपने के निर्देश दिए गए थे।
डॉ.समीर सिन्हा ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि उत्तराखंड वाले हिस्से पर तो डब्लूआईआई ने अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी है, लेकिन राजाजी टाइगर रिजर्व के उत्तर प्रदेश वाले हिस्से की स्थिति स्पष्ट नहीं है। इस पर बोर्ड ने डब्लूआईआई को यूपी वाले हिस्से में निरीक्षण कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा है।
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इस संबंध में मुख्य वन्यजीव प्रतिपालक डॉ.समीर सिन्हा ने कहा कि संभव है कि अगामी बैठक में यह मामला सुलझ जाएगा और इसके बाद राजाजी की 10 किमी की परिधि वाले हिस्से में भी खनन शुरू हो पाएगा। इससे राज्य को जहां राजस्व की प्राप्ति होगी, वहीं लोगों को सस्ती दरों पर खनन सामग्री उपलब्ध हो पाएगी। उन्होंने कहा कि बोर्ड बैठक में कुछ अन्य मसले भी उठे थे, जिन पर स्थिति अभी स्पष्ट नहीं हो पाई है।
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