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घर के अकेले कमाने वाले जिगर के टुकड़े की सलामती के लिए दिन-रात दुआ कबूल हुई लेकिन राहत की खबर मिलने के बाद मां को अपने बेटे का दीदार करने के लिए 72 घंटे तक इंतजार करना पड़ा। 10 सितंबर को मंजीत घर से काम करने निकला था। ठीक 81 दिन बाद शुक्रवार शाम छह बजे वह लखनऊ होते हुए घर पहुंचा।
शाम को सरकारी गाड़ी से घर पहुंचते ही मंजीत ने जब मां को देखा तो आंसुओं की धार फूट पड़ी। उसकी मां का भी यही हाल था। बेटे के स्वागत में सजी-संवरी चौधराइन खुद को काबू न रख सकीं और फफक कर रो पड़ीं। मंजीत ने सबसे पहले मां के चरणों में नमन कर आशीर्वाद लिया। मां चौधराइन ने मंगलगान के साथ मंजीत के माथे पर तिलक किया और आरती उतारी।
सोचा न था, सीएम योगी से मिलेंगे
मंजीत ने अपने घर पहुंचने पर कहा कि उनके लिए यह बहुत खूबसूरत पल है। वह तो सपने में भी नहीं सोच सकते थे कि सीएम योगी से मिलेंगे। सीडीओ और एसपी से मिलेंगे।
पिता ने सीएम को बताई घर की हालत
कर्ज पर नौ हजार रुपये लेकर बेटे की सकुलश वापसी का सपना लेकर उत्तरकाशी पहुंचे मंजीत के पिता चौधरी सबसे ज्यादा खुश दिखाई दिए। उन्होंने सीएम योगी से घर की आर्थिक स्थिति का जिक्र किया। हालांकि, कर्ज के बचे रुपयों के बारे में कहा कि हजार दो हजार अभी बचे हुए हैं। इससे पहले सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो में उन्होंने कहा था कि उनके पास नौ हजार रुपयों में से 290 रुपये ही बचे हैं।
बहनों ने पूरे घर को सजाया, जलाए दीये
मंजीत के पहुंचने पर भैरमपुर गांव में दिवाली मनाई गई। मंजीत की मां और दोनों बहनों ने पूरे घर को सजाया और दीये जलाए। एक दिन पहले तक जहां घर वालों के पास मिठाई खरीदने तक के पैसे नहीं थे, वहीं शुक्रवार को ग्रामीणों का सहयोग मिला तो उत्सव मना। करीबियों की दावत हुई।
मंजीत की दोनों बहनों ने जहां घर को गोबर से लीपकर आंगन पर रंगोली सजाई, वहीं मंजीत के एक दोस्त ने घर के बाहर टेंट लगवाया और कुर्सी आदि की व्यवस्था की।
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