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संकटमोचन
– फोटो : self
विस्तार
काशी के लिए संकटमोचन संगीत समारोह के मायने क्या हैं, इस सुरमयी मंच की सीरत क्या है, नजीर बनारसी का शेर उसे बयान करता है, सोएंगे तेरी गोद में एक दिन मरके, हम दम भी जो तोड़ेंगे तेरा दम भर के, हमने तो नमाजें भी पढ़ी हैं अक्सर, गंगा तेरे पानी से वजू करके..। धर्म-मजहब की तल्खियों के बीच संकटमोचन संगीत समारोह दिलों को सुकून देने वाली शीतल हवा के मानिंद है। ऐसी हवा जो गंगा-जमुनी तहजीब की महक हर ओर बिखेर रही है।
शुरुआत में भले समारोह में गैर हिंदू कलाकारों के आने पर अघोषित प्रतिबंध जैसा था, पर भारत रत्न उस्ताद बिस्मिल्लाह खां के भांजे मुमताज खां को पहली बार यहां अपनी फनकारी प्रस्तुत करने का मौका मिला। फिर तो ये सिलसिला जो बढ़ा तो बढ़ता ही गया। देश के कई अजीम कलाकार इस मंच पर आए और अपनी फनकारी से लोगों के दिलों में गंगा-जमुनी तहजीब की रोशनी को और चमकदार बना दिया। बात यहीं नहीं थमती, पाकिस्तान के मशहूर गायक गुलाम अली भी इस मंच के चमकते सितारे बने, वो भी एक बार नहीं, दो-दो बार।
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