Varanasi: पूर्वी उत्तर प्रदेश में हिन्दवी स्वराज और हिंदुत्व का झंडा गाड़ गया जाणता राजा

[ad_1]

Janata Raja is a symbol of self-respect of Hindus. The flag of Hindu Swaraj and Hindutva was planted

बीएचयू एम्फीथिण्टर मैदान में जाणता राजा के नाटक मंचन करते पुणे के कलाकार ।
– फोटो : रोहित सोनकर, संवाद

विस्तार


जाणता राजा हिंदुओं के स्वाभिमान का प्रतीक है। उनकी बौद्धिक कुशलता, युद्व की अद्भुत कला,शत्रु से दो दो हाथ कर निपटने की क्षमता ,स्वदेश प्रेम अन्य राजाओं से उनको बिल्कुल अलग करता है। जब भारत के अखण्ड स्वरूप के साथ विश्व गुरु की बात होती है तो हिंदुत्व के संकल्पकों के सामने बरबस ही छत्रपति शिवाजी का नाम आंखों के सामने आ जाता है। हिंदुओं के स्वाभिमान के प्रतीक भगवान राम को हिन्दू समाज  अयोध्या में मन्दिर रूप में प्रतिष्ठित देखना चाहता  है क्योंकि हिंदुओं का पवित्र तीर्थ अयोध्या पर मुस्लिम आक्रांता बाबर द्वारा कलंकित स्थान पूर्ण पवित्रता को प्राप्त हो सके। बाबर और औरंगजेब जैसे आक्रमण कारियों ने हिन्दू परंपरा, संस्कृति, और संस्कारों को ध्वस्त करने का काम किया। हिंदुत्व के उद्घोष को छत्रपति शिवाजी के माध्यम उनके चरित्र और जीवन को हर हिंदू आत्मसात करें इसके लिए राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ कृत संकल्पित है उस ओर लगातार कार्य कर रहा है वैसे भी शिवाजी का काशी से रिश्ता अटूट रहा है।

जब 21 नवम्बर की शाम बीएचयू की ओर जाने वाली हर सड़क हर हर महादेव के साथ ही जय भवानी जय शिवाजी के जय घोष कर रही थी, हजारों स्वर एक साथ मानो छत्रपति के राज्याभिषेक के लिए उल्लसित और उत्साहित  थे। यह नजारा था जाड़ता राजा महानाट्यमन्चन का.. मानो लग रहा था कि छत्रपपति शिवाजी स्वयं  सेना के साथ विद्यमान है यह दृश्य आज काशी हिंदू विश्वविद्यालय के एमपी थिएटर मैदान में दृश्यमान था। लगभग बारह हजार से अधिक संख्या में दर्शक उपस्थित थे ,बीच बीच में दर्शकों के मध्य से हर हर महादेव के भी उद्घोष हो रहा। शाम के तीन बजते ही एमपी थिएटर मैदान की ओर जाने वाली  विश्वविद्यालय की सड़क आम जनमानस से पटी पड़ी थी। जिस हिंदू मान वर्द्धन के लिए हिन्दू विश्वविद्यालय की स्थापना पण्डित मदन मोहन मालवीय ने की थी,आज वह उनके बगिया में जाड़ता राजा महानाट्यमन्चन  के द्वारा प्रासंगिक हो उठा।छत्रपति शिवाजी का काशी से अटूट रिश्ता रहा है उनके राज्याभिषेक के समय काशी के पंडित पुरोहितों ने तिथि का निर्धारण एवं राज्यभिषेक किया।महामना के जीवन में शिवाजी के जीवन यात्रा की प्रेरणा रही है।

शिवाजी सुशासन एवं स्वराज्य के समर्थक थे तो महामना ने जीवन भर इसके लिए कार्य किया। महानाट्यमन्चन के दर्शकों में युवाओं की संख्या बहुत ही ज्यादा है जो इस नाटक के लिए सुखद है। काशी जो हिंदुत्व का हमेशा से केंद्र रहा धर्म संस्कृति के रक्षण के साथ ही समय समय पर देश और दुनिया को दिशा देती रही है ऐसे में काशी को केंद्र बनाकर इस नाटक का मंचन पूरे पूर्वांचल के जनपदों में शिवाजी के माध्यम से हिंदुत्व के किले को मजबूत करना भी होगा।

[ad_2]

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *