बनारस में श्रद्धालुओं के लिए जल्द होगा एक और धाम – फोटो : बनारस में श्रद्धालुओं के लिए जल्द होगा एक और धाम
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मंदिरों के शहर बनारस में जल्द ही एक और धाम श्रद्धालुओं के लिए सुलभ होगा। पंढरपुर की प्रतिकृति के दर्शन श्रद्धालु नाना फणनवीस के बाडे़ में कर सकेंगे। हालांकि, बाड़े में चार सौ साल से भगवान विट्ठलनाथ शक्ति स्वरूपा रुक्मिणी देवी के साथ विराज रहे हैं। अब इस पूरे बाड़े का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। इसका बीड़ा विश्व मांगल्य सभा ने उठाया है।
विश्व मांगल्य सभा ने ब्रह्मा घाट स्थित नाना फणनवीस के बाड़े का अधिग्रहण कर लिया है। बाड़े में पंढरपुर की प्रतिकृति स्थापित करने का कार्य जनवरी से आरंभ हो जाएगा। अभी बाड़े का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। सभा के परामर्शदाता प्रशांत हरतालकर के मुताबिक, नाना फणनवीस के बाड़े में देश भर की महिलाओं के लिए अतिथि गृह भी बनवाया जाएगा। महिलाओं का मातृ धर्म प्रशिक्षण वर्ग संचालित होगा। 12 नवंबर 2023 तक पंढरपुर का यह धाम बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। निर्माण कार्यों पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होंगे। शुरू हो गई है विट्ठलनाथ की रसोई
अन्नपूर्णा की नगरी काशी में अब श्री विट्ठलनाथ की रसोई भी शुरू हो चुकी है। बाहर से आने वाले अतिथियों, साधु-संत, बटुकों और जरूरतमंदों के लिए श्रीनाथ अन्न रसोई की शुरूआत पिछले सप्ताह से हुई है। इसमें रोजाना दो सौ से ढाई सौ लोग भोजन कर रहे हैं। कोट
देश भर की महिलाओं के लिए यह ऐसा केंद्र होगा, जहां उन्हें धर्म, शास्त्र के प्रशिक्षण के साथ ही अतिथि गृह की सुविधा भी मिलेगी। 12 हजार स्क्वायर फीट में निर्माण होना है। नाना फणनवीस के बाड़े को ध्वस्त नहीं किया जाएगा। – शिवांगी द्विवेदी, प्रकल्प संयोजिका और प्रोजेक्ट इंचार्ज इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा नाना फणनवीस का बाड़ा
पंढरपुर की प्रतिकृति स्थापित होने के साथ ही नाना फणनवीस का बाड़ा अब इतिहास के पन्नों में दर्ज हो जाएगा। भवन का नाम बदलकर एकनाथ करने की तैयारी है।
नाना फणनवीस ने कराया था बाड़े का निर्माण ब्रह्मा घाट स्थित नाना फणनवीस के बाड़े का इतिहास 400 साल से भी अधिक पुराना है। महारानी लक्ष्मीबाई की सेना में शामिल नाना फणनवीस ने इस बाड़े का निर्माण करवाया था। जब अंग्रेजों के खिलाफ आंदोलन की शुरूआत हुई थी, तब स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों का गढ़ नाना फणनवीस का बाड़ा ही हुआ करता था। बाड़े के गुप्त कमरों में ही स्वतंत्रता सेनानियों की बैठक होती थी। कई गुप्त कमरे आज भी हैं।
भीमा नदी के तट पर स्थित है पंढरपुर का विठोबा मंदिर पंढरपुर का विठोबा मंदिर पश्चिमी भारत के दक्षिणी महाराष्ट्र राज्य में भीमा नदी के तट पर शोलापुर नगर के पश्चिम में स्थित है। इस मंदिर में विठोबा के रूप में भगवान श्रीकृष्ण की पूजा की जाती है। यहां भक्तराज पुंडलिक का स्मारक बना हुआ है। पंढरपुर तीर्थ की स्थापना 11वीं शताब्दी में हुई थी। मुख्य मंदिर का निर्माण 12वीं शताब्दी में देवगिरि के यादव शासकों द्वारा कराया गया था। श्री विट्ठल मंदिर यहां का मुख्य मंदिर है। भगवान विष्णु के अवतार विठोबा और उनकी पत्नी रुक्मणि के सम्मान में इस शहर में वर्ष में 4 बार त्योहार मनाने एकत्र होते हैं। इनमें सबसे ज्यादा श्रद्धालु आषाढ़ के महीने में फिर क्रमश: कार्तिक, माघ और श्रावण महीने में एकत्रित होते हैं। ऐसी मान्यता है कि ये यात्राएं पिछले 800 सालों से लगातार आयोजित की जाती रही हैं। श्रीकृष्ण भक्त पुंडलिक माता-पिता के परम सेवक थे। एक दिन वे माता-पिता की सेवा में लगे थे, तभी श्रीकृष्ण उन्हें दर्शन देने के लिए द्वार पर पधारे। लेकिन पुंडलिक उस वक्त पिता के चरण दबाते रहे। उस वक्त भगवान को खड़े होने के लिए उन्होंने ईंट सरका दी किंतु वे उठे नहीं। भगवान कमर पर हाथ रखे ईंट पर खड़े रहे इसीलिए निज मंदिर में भगवान की मूर्ति कमर पर हाथ रखे खड़े हैं। यहां भगवान श्रीकृष्ण विठोबा के रूप में हैं जिन्होंने भक्त पुंडलिक की पितृभक्ति से प्रसन्न होकर उसके द्वारा फेंके हुए एक पत्थर (विठ या ईंट) को ही सहर्ष अपना आसन बना लिया था इसीलिए इनका नाम ‘विठोबा’ हो गया।
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मंदिरों के शहर बनारस में जल्द ही एक और धाम श्रद्धालुओं के लिए सुलभ होगा। पंढरपुर की प्रतिकृति के दर्शन श्रद्धालु नाना फणनवीस के बाडे़ में कर सकेंगे। हालांकि, बाड़े में चार सौ साल से भगवान विट्ठलनाथ शक्ति स्वरूपा रुक्मिणी देवी के साथ विराज रहे हैं। अब इस पूरे बाड़े का जीर्णोद्धार कराया जाएगा। इसका बीड़ा विश्व मांगल्य सभा ने उठाया है।
विश्व मांगल्य सभा ने ब्रह्मा घाट स्थित नाना फणनवीस के बाड़े का अधिग्रहण कर लिया है। बाड़े में पंढरपुर की प्रतिकृति स्थापित करने का कार्य जनवरी से आरंभ हो जाएगा। अभी बाड़े का जीर्णोद्धार कराया जा रहा है। सभा के परामर्शदाता प्रशांत हरतालकर के मुताबिक, नाना फणनवीस के बाड़े में देश भर की महिलाओं के लिए अतिथि गृह भी बनवाया जाएगा। महिलाओं का मातृ धर्म प्रशिक्षण वर्ग संचालित होगा। 12 नवंबर 2023 तक पंढरपुर का यह धाम बनकर तैयार हो जाएगा। इसके बाद श्रद्धालुओं के लिए खोला जाएगा। निर्माण कार्यों पर करीब 10 करोड़ रुपये खर्च होंगे।