World TB Day :  क्षय रोग से पीड़ित 18% महिलाएं हो रहीं बांझपन का शिकार, बीच में इलाज छोड़ना भी है संकट का सबब

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सांकेतिक तस्वीर...

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क्षय रोग (टीबी) से पीड़ित महिलाएं बांझपन का शिकार हो रही हैं। अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में हर साल तीन हजार से अधिक महिलाएं उपचार करवाने आती हैं। इनमें 16 से 18 फीसदी महिलाओं में टीबी का कारण बांझपन पाया गया है, जबकि देश में यह आंकड़ा 10 फीसदी तक है। 

महिलाएं यदि बीच में उपचार छोड़ दें तो ठीक होने पर भी फिर से बीमार हो सकती हैं। ऐसी महिलाओं के उपचार के दौरान डॉक्टरों ने पाया है कि इनकी माहवारी प्रभावित हुई है। कई महिलाओं को माहवारी आनी तक बंद हो गई है।

विशेषज्ञों का कहना है कि महिलाओं में होने वाले टीबी का गर्भाशय पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। यह देश में तेजी से बढ़ रहा है। ऐसी महिलाएं यदि गर्भवती होती हैं तो उन्हें विशेष रूप से सतर्क रहना चाहिए। उन्हें दवाइयों का कोर्स बिना डॉक्टर की सलाह से बंद नहीं करना चाहिए। इससे नवजात में भी टीबी का खतरा रहता है। 

जागरूकता से रुकेगी बीमारी

बृहस्पतिवार को देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए विश्व क्षय रोग पर एम्स में चर्चा हुई। इसमें एम्स के न्यूरोलॉजिस्ट विभाग की प्रमुख प्रोफेसर डॉ. एमवी पद्मा श्रीवास्तव, डॉ. अनंत मोहन, डॉ. एसके काबरा, डॉ. जेबी शर्मा, डॉ. विनीत आहूजा, डॉ. भावुक गर्ग सहित अन्य ने टीबी से बचाव पर चर्चा की। चर्चा के दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि जागरूकता से टीबी को रोका जा सकता है। हालांकि, इसके लक्षण जल्द पता नहीं चलते, लेकिन परिवार में यदि किसी को है तो पहले जांच कर इसे रोका जा सकता है। देश ने वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य रखा गया है। 

पूरे शरीर को करता है प्रभावित 

डॉक्टरों ने बताया कि टीबी पूरे शरीर के किसी भी हिस्से में हो सकता है। उक्त जगह के आधार पर लक्षण भी अलग पाए जाते हैं। एम्स में हर साल तीन से चार हजार बच्चे टीबी के उपचार के लिए आते हैं। इनमें करीब 300 मरीज नए होते हैं। इसके अलावा स्पाइन, दिमाग, लंग्स, पेट से जुड़े सहित शरीर के अन्य सभी अंगों को टीबी सीधे प्रभावित कर सकता है। 

ग्रामीण क्षेत्र में ध्यान देने की जरूरत 

डॉ. शुचीन बजाज का कहना है कि देश में हर साल 20 लाख लोगों को टीबी जकड़ लेता है। ग्रामीण क्षेत्र में इसकी जांच तेज करने की जरूरत है। 2025 तक देश को टीबी मुक्त बनाने के लिए ग्रामीण क्षेत्र में जांच बढ़ाने की जरूरत है। इसके कारण मृत्यु दर भी बढ़ रही है। गांवों में टीबी उन्मूलन के प्रयासों पर ध्यान देना महत्वपूर्ण है।

यह होते हैं लक्षण

  • भूख न लगना, कमजोरी आना 
  • लंबे समय तक बुखार रहना 
  • अचानक वजन घटना 
  • दो सप्ताह से अधिक सिर में दर्द रहना 
  • बच्चों में सुस्ती रहना 

पीड़ित परिवार के बच्चों को खतरा

एम्स के विशेषज्ञों की मानें तो टीबी किसी भी उम्र में हो सकता है। यदि किसी परिवार में कोई टीबी से पीड़ित है तो परिवार के सभी सदस्यों को जांच करवानी चाहिए। घर में यदि कोई बच्चा सुस्त रहता है, हल्का बुखार हो या वजन घट रहा हो तो भी जांच करवानी चाहिए। पांच साल तक के बच्चों के दिमाग में टीबी का खतरा ज्यादा होता है, जबकि पांच साल के अधिक उम्र के बच्चों में छाती में टीबी होता है। टीबी एक ऐसी बीमारी है, जो संक्रमित व्यक्ति की खांसी और छींक से आसानी से फैलती है।

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