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मुकुल निवासी गढ़ी भरवारी मथुरा ने बताया कि उसकी दादी कस्तूरी(95) ने कांवड़ लेने की इच्छा जाहिर की थी। इसके बाद वह अपनी पत्नी पिंकी और दादी को लेकर हरिद्वार आ गए। उम्रदराज होने के कारण दादी चलने में असमर्थ थी। गंगाजल भरने के बाद उन्होंने दादी को कंधों पर बैठा लिया और घर तक ऐसे ही लेकर जाने का निश्चय किया।
डाक कांवड़ से पहले हाईवे से लेकर कांवड़ पटरी तक शिवभक्तों का राज है। भगवामय हुए मार्गों पर भव्य कांवड़ शोभा बढ़ा रही हैं। इन्हें देखने के लिए बड़ी संख्या में क्षेत्र के लोग सड़कों किनारे जुट रहे हैं।
जैसे-जैसे शिवरात्रि की तिथि नजदीक आ रही है वैसे ही हाईवे और कांवड़ पटरी पर शिवभक्तों की संख्या में इजाफा हो रहा है। शिव के भक्ति गीतों से गुंजायमान हो रहे मार्गों की शोभा देखते ही बन रही है। शिवभक्त कांवड़ को बीच-बीच में रोक रोककर नृत्य कर रहे हैं। जिनको देखने के लिए स्थानीय लाेगों की दिलचस्बी बढ़ रही है।
शाम होते ही लोग घर का जरूरी काम निपटाकर कांवड़ पटरी और हाईवे पर पहुंच रहे हैं। जगह-जगह भंडारे और राहत शिविरों में भी भक्ति और सेवा का नजारा देखने को मिल रहा है। कांवड़ पटरी पर हाथों में गंगाजल लेकर और पैरों में घुंघरु बांधकर कतारबद्ध चल रहे शिवभक्त यात्रा की खूबसूरती में चारचांद लगा रहे हैं।
इसके साथ ही प्रशासन की ओर से कांवड़ पटरी पर जगह-जगह बल्लियों पर लगाए गए डीजे सेट से भक्ति संगीत की धुन प्रसारित कर रहे हैं। जो माहौल को और ज्यादा भक्तिमय बना रहा है।
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