[ad_1]

गोरक्ष एन्क्लेव के लिए खोदे गए गड्ढे के बाद पास के मकान की दीवार में पड़ी दरारे।
– फोटो : अमर उजाला।
विस्तार
गोरखपुर में नियमों की अनदेखी कर रामगढ़ताल के सामने स्थित चंपा देवी पार्क के पास बन रहे गोरक्ष एन्क्लेव की वजह से आसपास के लोगों की जान आफत में फंस गई है। सात तल की इस ग्रुप हाउसिंग इमारत की पाइलिंग एवं बेसमेंट के लिए खोदे गए करीब 20 फीट गहरे गड्ढे से आसपास के आधा दर्जन से अधिक घरों की, दीवारें, छत और चहारदीवारी में बड़ी-बड़ी दरारें पड़ गई हैं जो लगातार बढ़ती जा रही हैं।
क्षेत्र के लोगों का आरोप है कि इस संबंध में उन्होंने ठेकेदार और जीडीए के अधिकारियों को कई बार सूचना और प्रार्थनापत्र दिया, मगर कोई सुनवाई ही नहीं हुई और माैके पर काम जारी है। उधर, जीडीए के अधिकारियों का कहना है कि उन्हें मामले की जानकारी ही नही है। जांच कराएंगे।
तारामंडल स्थित लेक व्यू आवासीय परियोजना के बाद जीडीए ने पिछले साल अपनी दूसरी सबसे ऊंची इमारत वाली ग्रुप हाउसिंग परियोजना गोरक्ष एन्क्लेव शुरू की। सात तल वाली इस परियोजना में दो टॉवर होंगे जिनमें टू बीएचके और थ्री बीएचके के 90 फ्लैट बनाए जा रहे हैं। इमारत ऊंची होने की वजह से इसके पिलर के लिए काफी गहराई तक गड्ढा खोदा गया है। वर्तमान में बेसमेंट बनाने का काम चल रहा है।
इसे भी पढ़ें: गोरखपुर में बोले सीएम योगी: गिरमिटिया मजदूर नहीं, उद्योगपति बनेंगे दक्षिणांचल के लोग
परियोजना के दक्षिण कोई निर्माण नहीं है, लेकिन उत्तर की तरफ इंदिरा नगर कॉलोनी के आधा दर्जन से अधिक घर हैं। काम कराने वाले ठेकेदार ने इन घरों से सटे गड्ढा खोद दिया और प्राधिकरण के जिम्मेदारों ने भी आंखें मूंदे रखीं। करीब 20 फीट तक गहरे गड्ढे की वजह से इन सभी मकानों में पिछले साल अगस्त महीने के बाद से ही दरारें पड़ने लगी। पहले यह दरारे छोटी और हल्की थीं तो स्थानीय लोगों ने भी बहुत ध्यान नहीं दिया, लेकिन धीरे-धीरे यह बड़ी और गहरी होने लगी तो उनकी चिंता बढ़ गई।
कुछ लोगों ने सीमेंट-बालू के मसाले से इसे भरने की कोशिश की तो किसी ने एहतियातन संबंधित कमरे की तरफ आना-जाना ही बंद कर दिया। कुछ लोगों की छत भी दरक गई है। एक व्यक्ति के घर की नौ इंच चौड़ी दीवार के आर-पार दिखाई पड़ने लगा, उसकी मरम्मत करवाने के बाद अब दूसरी जगहों पर दरारें पड़ने लगी हैं। यहां रह रहे लोग डर में जी रहे हैं। उनका कहना है कि कहीं कोई अनहोनी हुई तो घर के सदस्यों की जान भी जा सकती है।
[ad_2]
Source link