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AIIMS (एम्स)
– फोटो : अमर उजाला
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जलने व अन्य कारणों से स्किन खो चुके मरीजों को फिर से त्वचा मिल सकेगी। त्वचा के अभाव में मरीज संक्रमण का शिकार होकर दम तोड़ देता है। ऐसे मरीजों को बचाने के लिए स्किन ग्राफ्टिंग की जा सकती है। यह प्रयोग बर्न के मामलों में मरीजों की मृत्यु दर को 50 फीसदी तक घटा सकता है।
इसे देखते हुए एम्स में उत्तर भारत के दूसरे त्वचा बैंक की औपचारिक शुरुआत संस्थान के निदेशक डॉ. एम श्रीनिवास ने गुरुवार को की। हालांकि, इस त्वचा बैंक को अभी दिल्ली सरकार के स्वास्थ्य विभाग के अंग प्रत्यारोपण संगठन से लाइसेंस का इंतजार है। एम्स प्रशासन को उम्मीद है कि अगले 10-15 दिनों में लाइसेंस मिल जाएगा। यहां पर 18 से 80 वर्ष की उम्र के व्यक्ति के शव से त्वचा लिया जा सकेगा। एक व्यक्ति से मिली त्वचा से दो मरीजों की जिंदगी बच सकेगी।
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